भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता को लेकर कई तरह के सवाल उठते हैं। कुछ लोग कहते हैं टेलीविजन से सीधा प्रसारण, कुछ लोग कहते हैं खिलाडिय़ों को मिलने वाली राशि, कुछ लोग कहते हैं प्रायोजकों की भूमिका परंतु इसका सिर्फ एक ही उत्तर है क्रिकेट के खिलाडिय़ों का शानदार प्रदर्शन। इस तथ्य को अभी-अभी सिद्ध किया है हमारे देश के उभरते हुए युवा क्रिकेटरों ने। वे न्यूजीलैंड में आयोजित अंडर-19 विश्वकप के चैंपियन बन गये हैं। ऐसा करिश्मा भारतीय युवा खिलाडिय़ों ने इसके पहले तीन बार और किया है। सर्वप्रथम वर्ष 2000 में मोहम्मद कैफ, 2008 में विराट कोहली और 2012 में उन्मुक्त चंद के नेतृत्व में भारत विश्वकप विजेता बन चुकी है।
2018 में चौथी बार पृथ्वी शॉ की अगुवाई में भारत ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की। भारत ने इस स्पर्धा में लगातार बेहतरीन खेल दिखाया। पहले मैच में आस्ट्रेलिया को 100 रन, दूसरे व तीसरे मुकाबले में न्यू पापुआगिनी व जिंबाब्वे को 10 विकेट, क्वार्टर फायनल में बांग्लादेश को 131 रन, सेमीफायनल में पाकिस्तान को 203 रन, अंतत: फायनल में आस्ट्रेलिया को 8 विकेट से एकतरफा पराजित किया। इस चैंपियनशिप की शुरुवात 1988 में मेकडावेल्स बाइसेंटिनिएल यूथ वल्र्ड कप के रूप में हुई, बाद में इसे अंडर 19 वल्र्ड कप का नाम दिया गया। और 1998 से इसे निरंतर प्रत्येक  दो वर्ष के अंतराल में आयोजित किया जा रहा है।

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इस तरह2018 में इस स्पर्धा के 11 वें संस्करण का संपन्न हुआ। 11 में से 4 बार भारतीय क्रिकेटरों ने इस प्रतियोगिता को अपनी झोली में डाला है। इससे स्पष्ट होता है कि हमारे युवा क्रिकेटर अपने खेल के प्रति कितना समर्पित हैं तथा कठोर परिश्रम करते हैं।
अंडर-19 टीम के सदस्यों में से कई खिलाडिय़ों ने वरिष्ठ क्रिकेट टीम में जगह बनाई है उनमें प्रवीण आमरे, नरेन्द्र हिरवानी, नयन मोंगिया, वेंकटपति राजू (1988), मोहम्मद कैफ, वीरेन्द्र सहवाग, लक्ष्मी रतन शुक्ला, हरभजन सिंह, (1998), अजय रात्रा, युवराज सिंह (2000), पार्थिव पटेल, इरफान पठान, स्टुवर्ट बिन्नी (2002), रॉबिन सिंह, शिखर धवन, दिनेश कार्तिक, सुरेश रैना, आर.पी. सिंह, रॉबिन उथप्पा (2004), पीयुष चावला, रवीन्द्र जडेजा, चेतेश्वर पुजारा, रोहित शर्मा (2006), विराट कोहली, अभिनव मुकुंद, सौरभ तिवारी, मनीष पांडे, (2008),जयदेव उनादकाट, लोकेश राहुल, संदीप शर्मा, (2010), श्रेयस अय्यर, सरफराज खान, कुलदीप यादव, संजू सेमसन (2014), ऋषभ पंत, वाशिंगटन सुंदर (2016) ये कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने आगे चलकर भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाई। हमारे क्रिकेटरों की इस उपलब्धि को देखते हुए स्पष्ट तौर से कहा जा सकता है कि क्रिकेट के खेल की प्रसिद्धि खिलाडिय़ों की मेहनत का फल है। भारत का नाम 1983 और 2011 के विश्व कप विजेता के रूप में दर्ज है। हमारे क्रिकेटरों ने न सिर्फ युवा टीम में बल्कि वरिष्ठ टीम में भाग लेकर अपनी योग्यता सिद्ध की है। आज भारत के खेल जगत में हॉकी के अलावा सिर्फ क्रिकेट के युवा खिलाड़ी हैं, जिन्होंने युवा वर्ग के विश्व कप पर कब्जा जमाया हुआ है। हॉकी में दिसम्बर 2017 के अनुसार भारत की विश्व पुरुष टीम को 6 वीं वरीयता प्राप्त है जबकि क्रिकेट के टेस्ट मैच में भारतीय टीम को पहला, एकदिवसीय मुकाबले में भी पहला तथा टी-20 में दूसरा स्थान प्राप्त है। भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता के पीछे मुख्यत: खिलाडिय़ों का समर्पण, लगन और अभ्यास ही प्रमुख है। टीम  खेलों में भारत के अन्य खेलों के लिए क्रिकेट की उपलब्धि एक चुनौती है। अत: दूसरे खेलों के खिलाडिय़ों को इस स्तर पर आगे आने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।