सभ्य से असभ्य की ओर बढ़ते क्रिकेटर

पैसा, घमंड के कारण आज क्रिकेट जैसा खेल बदनाम होता जा रहा है। धन कमाने की धुन क्रिकेटरों के दिल और दिमाग में निरंतर बनी रहती है। अपने आपको दूसरों से कहीं अधिक श्रेष्ठ सिद्ध करने की चाहत कई क्रिकेटरों को गलत मार्ग में ले गई है। अभी हाल ही में दक्षिण अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच की श्रृंखला चल रही थी। इसी दौरान तीसरे टेस्ट मैच के दौरान आस्ट्रेलियाई गेंदबाज केमरून बेनक्राफ्ट द्वारा गेंद के साथ की जा रही संदिग्ध गतिविधि कैमरे की नजर से नहीं बच सकी। उस समय बेनक्राफ्ट अपनी पतलून के सामने की ओर से कुछ द्रव्य निकालकर गेंद पर लगा रहे थे। इस प्रकरण के पकड़ में आने के बाद दोनों अंपायरों  ने बेनक्राफ्ट को रंगे हाथों पकड़ा। पूरी दुनिया में आस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों की छिछालेदर हो गई। इस घटना का ध्यान रखते हुए क्रिकेट आस्ट्रेलिया न इयान राय और पेट हावार्ड को तत्काल जांच का जिम्मा सौंपा। जिसमें गेंद टेम्परिंग का कृत्य सामने आया। जाच रिपोर्ट सही पाए जाने के कारण क्रिकेट आस्ट्रेलिया ने इसी टेस्ट मैच के दौरान बतौर सजा कप्तान स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर को कप्तान, उपकप्तान पद से हटा दिए गए। बाद में टीम के कोच लेहमन को भी पद से हटा दिया गया। क्रिकेट आस्ट्रेलिया के द्वारा इस तरह लिया गया फटाफट निर्णय स्वयं कटघरे में है।

गेंद से छेडख़ानी को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के कानून के अनुसार लेबल दो अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अब सवाल यह उठता है कि कप्तान, उपकप्तान, कोच हटा लिए गए परंतु कौन हैं वे लोग जो ऐसे कृत्यों को बढ़ावा देते हैं? वस्तुत: क्रिकेट आस्ट्रेलिया के खिलाडिय़ों को इन्हीं पदाधिकारियों ने सिर चढ़ा रखा है। विश्व में टेस्ट रेकिंग का सवाल है कि भारत 121 रेटिंग के साथ पहले स्थान पर, दक्षिण अफ्रीका 115 रेटिंग के साथ दूसरे और 104 रेटिंग के साथ आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर है। यानी इस श्रृंखला में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध पूर्ण सफाया होने पर भी ऑस्ट्रेलिया का दक्षिण अफ्रीका से आगे बढऩा करीब-करीब मुश्किल था। इतना सब कुछ होते हुए आस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों ने शर्मनाक घटना को अंजाम दिया। आस्टे्रलिया में क्रिकेट को संचालित करने वाली संस्था, क्रिकेट आस्टे्रलिया (सी.ए.) ने खिलाडिय़ों, कोच पर अपनी इज्जत बचाने के लिए की गई कार्यवाही से क्रिकेट के प्रत्येक शुीाचिंतक को क्रिकेट आस्ट्रेलिया का यह फटाफट निर्णय रास नहीं आया। वस्तुत: वह अपनी चमड़ी बचा रही है। गेंद से छेड़छाड़ का मामला बेहद संवेदनशील है। चूंकि यह अपराध अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों का उल्लंघन करता है तो कार्यवाही को आईसीसी के पदाधिकारियों पर छोड़ा जाना चाहिए था।

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क्रिकेट आस्ट्रेलिया के पदाधिकारी अपने देश को काला धब्बा लगाने से बचा रहे हैं। वस्तुत: आईसीसी को कड़ा कदम उठाते हुए आस्ट्रेलियाई टीम के कर्णधारों पर तीन-चार वर्षों का प्रतिबंध लगाना चाहिए। इस तरह की हरकत पर कड़ा प्रतिबंध नहीं लगाने के कारण आज क्रिकेटर खेल भावना का खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। आगामी 4 अप्रैल से आस्ट्रेलिया के गोल्ट कोष्ट में होने वाली 21वीं राष्ट्रमंडल खेलों पर इसका कोई फर्क न पड़ जाए इस तथ्य को ध्यान रखते हुए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने चालाकी भरा त्वरित निर्णय लिया है। आईसीसी चाहे तो पूरी टीम पर प्रतिबंध लगा सकता है क्योंकि गेंद के साथ छेड़छाड़ की घटना से सभी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी वाकिफ होंगे। क्रिकेट की लोकप्रियता ने इस खेल के स्वरूप को बिगाड़ दिया है। अब दुनिया भर के क्रिकेटरों में खेल भावना का अभाव होता जा रहा है। इस तरह की धोखाधड़ी का असर अन्य खेलों के खिलाडिय़ों पर न पड़े यह सुनिश्चित करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम के बाकी खिलाडिय़ों को भी कड़ी सजा दी जानी चाहिए।