क्रिकेट: प्रसारण अधिकार खरीदने की होड़: आखिरकार 6138 करोड़ रूपये में लिया स्टार टीवी ने

उपभोक्ताओं के जेब पर अप्रत्यक्ष डाका

क्रिकेट को किस तरह धन उपार्जन की मंडी बना दी गई है इसका ताजा उदाहरण इसके प्रसारण अधिकार को खरीदने के दौरान मिला। वस्तुत: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के नियमों के अनुसार यह स्पष्ट है कि वह प्रसारण अधिकार को किसी उपयुक्त संस्था को बेच सकता है। पहली बार इस तरह के प्रसारण अधिकार के विक्रय के लिए ऑनलाइन पद्धति अपनाई गई। इसके लिए स्टार टीवी के साथ-साथ सोनी और रिलायंस जियो ने भी भाग लिया। इस बार स्टार टीवी ने आगामी 2023 तक (5 वर्षों) के वैश्विक समग्र अधिकार (जीसीआर) रिकार्ड 6138.1 करोड़ रुपये में तीन दिनों तक बोली के बाद प्राप्त कर लिया है। 2012 में भी स्टार टीवी ने प्रसारण अधिकार खरीदा था तब उन्होंने बीसीसीआई को 3851 करोड़ रूपये की बोली लगाई थी। इस बार की बोली 59 प्रतिशत ज्यादा लगाई गई है। दोनों नीलामी की तुलना से स्पष्ट हो जाता है कि जहां पिछली बार की बोली से बीसीसीआई को एक मैच से 43 करोड़ रुपये मिलते थे अब 60 करोड़ रुपये प्रति मैच औसत प्राप्त होंगे। स्टार टीवी ने इसके पहले सोनी से इंडियन प्रीमियर लीग क्रिकेट के प्रसारण के अधिकार को हथिया लिया था। स्टार ने अगले 5 वर्षों के लिए 16,347 करोड़ रुपये की बोली लगाई। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का गठन 15 जून 1909 को इंग्लैंड में हुआ था। वर्तमान में उसके पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या 12 है जबकि एसोसिएट सदस्यों की संख्या 93 है। वस्तुत: पूर्णकालिक सदस्य देशों की टीम को टेस्ट मैच, सीमित 50-50 ओवर के एक दिवसीय मैच और टी-20 मैच खेलने का अधिकार होता है। क्वालीफायर मुकाबले के बाद एसोसिएट टीम भी अंतिम दौड़ में शामिल हो सकती है। आखिरकार अब प्रश्न यह है कि क्रिकेट से धन कमाने वाली स्टार टीवी जैसी प्रसारण संस्था इतनी बड़ी राशि कैसे जुटा लेती है। इस तरह की बोलियां विशेषज्ञों द्वारा गुणा-भाग करके निकाली जाती है।

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इसमें प्रसारण अधिकार लेने वाली संस्था को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। एक मैच के लिए औसतन 60 करोड़ रुपये के भुगतान की या फिर 5 वर्षों में 6138 करोड़ रुपये बीसीसीआई को दिये जाने का करार हो, जेब से पैसा दर्शकों का, अपने उत्पाद को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं, बड़े कारपोरेट घराने, उद्योगपतियों का ही जाता है। अब तो इस तरह के प्रसारण के लिए राजनेता, फिल्मी कलाकार, प्रसिद्ध खिलाड़ी आदि भी धन लगाने लगे हैं। कहते हैं जब बिजली गिरती है तो धरती में समा जाती है, वही हाल बीसीसीआई के प्रसारण अधिकार की नीलामी  का है। इस पर लगाई गई बोली के कारण आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त खर्च का भार आ पड़ता है। इसका असर न सिर्फ टेलीविजन दर्शकों, स्टेडियम में मैच देखने वाले दर्शकों पर पड़ता है परंतु क्रिकेट को पसंद करने या न करने वाले प्रत्येक देशवासी पर पड़ता है चूंकि प्रसारण का अधिकार वैश्विक है अत: जहां पर भी मैचों का प्रसारण होगा वहां के दर्शक व जनता पर महंगाई की मार पड़ेगी। प्रसारण के दौरान दिखाए जाने वाले उत्पादों के विज्ञापन पर प्रति सेकंड हजारों रुपये स्टार टीवी के मार्केटिंग विंग द्वारा वसूल किया जायेगा। हकीकत है जब विज्ञापन पर 60 से 70 प्रतिशत तक अधिक राशि लगेगी ऐसा उत्पाद जब बाजार में आम जनता के लिए आएगा तो निश्चित है उसकी कीमत भी बढ़ेगी। याने खेल प्रेमी हो या ना हो सीधे तौर पर उसकी जेब कटेगी। ठीक इसी तरह डायरेक्ट टू होम (डी.टी.एच.) से होने वाले प्रसारण के लिए प्रत्येक कनेक्शन रखने वाले से अतिरिक्त राशि ली जायेगी। इस तरह बीसीसीआई भले ही अमीर से अमीर खेल संस्था बन जाये या फिर स्टार टीवी करोड़ों रुपए लाभ अर्जित कर ले सब कुछ भारत सहित विश्व के लोगों के द्वारा उत्पादन या कनेक्शन के माध्यम से दिए गए राशि के द्वारा ही संभव है। अगर हम दूसरा पक्ष देखें तो इतनी धनराशि की कमाई करके चाहे बीसीसीआई हो या स्टार टीवी दूसरे देशों की बात छोड़ दे तो ज्वलंत प्रश्न खड़ा है कि हमारे भारत देश के सामाजिक, आर्थिक, (पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी ) क्षेत्र में विकास के लिए उनका क्या योगदान है?

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