दशा व दिशा बदलने के लिए प्रयासरत सरकार 
ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में पदक प्राप्त करने को किसी देश की खेल शक्ति का प्रतीक माना जाता है। स्वतंत्रता से पहले ब्रिटिश भारत की ओर से भाग लेते हुए नार्मन प्रिचर्ड ने सन् 1900 के पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए 100 मीटर दौड़ व 200 मीटर बाधा दौड़ में दो रजत पदक प्राप्त किए थे।
आजादी के बाद 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में भारत के खसाबा दादासाहेब जाधव ने सबसे पहले व्यक्तिगत रूप से कुश्ती में कांस्य पदक जीता। दूसरी तरफ स्वतंत्रता से पहले 1928, 1932, 1936, में फिर 1948, 1952, 1956, 1964, 1980 में हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता। भारत के लिए, इन आठ स्वर्ण पदकों के अलावा व्यक्तिगत खेल में 2008 बीजिंग ओलंपिक में पहली बार 10 मी.एयर रायफल में निशानेबाज अभिनव बिन्द्रा ने स्वर्ण पदक जीता। भारत ने 1896 से आरंभ आधुनिक ओलंपिक में अब तक 1896, 1904, 1912 में संपन्न ओलंपिक खेलों को छोड़कर 27 में से 24 में भाग लिया लेकिन अब तक 28 पदक जिनमें 9 स्वर्ण, 7 रजत,  12 कांस्य पदक हासिल किए हैं। स्वतंत्र भारत के ओलंपिक इतिहास में निशानेबाज राज्यवद्र्घन सिंह राठौर (वर्तमान में भारत के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री )व्यक्तिगत खेल में 2004 के एथेंस खेलों में पहला रजत पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी है। यह उपलब्धि उन्होंने डबल ट्रेप इवेंट में हासिल किया। अभिनव बिन्द्रा 2008 में निशानेबाजी के व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी हैं। दूसरी तरफ पहलवान सुशील कुमार व्यक्तिगत खेल कुश्ती में दो अलग-अलग ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले पहले व एकमात्र खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक खेलों में कांस्य, 2012 लंदन ओलंपिक खेलों में रजत पदक जीता। इन खेलों में पहली महिलाओं के व्यक्तिगत खेल में पदक हासिल करने वाली भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी हैं। उन्होंने सिडनी में 2000 में संपन्न ओलंपिक खेलों के 69 कि.ग्रा. वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया।

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130 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत देश के द्वारा 24 ओलंपिक खेलों में हासिल की गई उपलब्धि पर खेल से जुड़े भारत के समस्त लोग असंतुष्ट रहे हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने निर्णायक कदम उठाते हुए टारगेट ओलंपिक पोडियम (टाप) स्कीम की शुरुवात की। इसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाडिय़ों का चयन करने के लिए सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता में राहुल द्रविड़, पुलेला गोपीचंद, अभिनव बिन्द्रा, सुश्री एम.सी. मेरीकाम की कमेटी का गठन किया गया। (बाद में इसमें फेरबदल होते गये) शुरुवाती दौर में 19 एथलीट, 16 तीरंदाज, 06 शटलर, 08 मुक्केबाज, 07 पहलवान व 2 नाविकों का चयन किया गया। इस योजना के अंतर्गत चयनित किए जाने वाले खिलाडिय़ों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण, सुविधा दिया जाना है। केन्द्रीय खेल मंत्री ने पिछले दिनों जानकारी दी है कि करीब 220 प्रतिभावान खिलाडिय़ों का चयन इस योजना के अंतर्गत किया जा चुका है। सितम्बर 2017 में उन्होंने बताया कि विभिन्न खेलों के करीब 107 एथलीटों को टारगेट ओलंपिक पोडियम के लिए चुन लिया गया है।
107 में से सिर्फ चार खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें 2020 के टोक्यो ओलंपिक तक के लिए चुना गया है। बाकी एथलीट 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों की तैयारी में गहन प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। 107 एथलीटों में 19 खिलाड़ी दिव्यांग याने पैरा स्पोटर््स से हैं। प्रत्येक एथलीट जिनका चयन इस योजना के अंतर्गत होगा उन्हें मासिक पचास हजार रुपये की मदद दी जायेगी। चयन के बाद अब नवीनतम सूची में एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, कुश्ती, ब्रुशु, तीरंदाजी, सायकलिंग, जुडो, जिमनास्टिक, बैडमिंटन, टेनिस, निशानेबाजी, स्क्वैश के खिलाड़ी शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा ओलंपिक खेलों में पदक प्राप्त खिलाडिय़ों का पेशन 10000 से 20000, विश्व कप या विश्व स्पर्धा में पदक विजेताओं को 8 हजार से 16 हजार, राष्ट्रमंडल, एशियाई खेलों में पदक विजेताओं को सात हजार से चौदह हजार पेंशन दी जायेगी। कुल मिलाकर एक खिलाड़ी को खेल मंत्री नियुक्त किए जाने का साफ-साफ सकारात्मक परिणाम नजर आ रहा है। जरूरत इस बात की है कि खिलाडिय़ों के हित वाले ऐसी योजनाओं का प्रचार-प्रसार गांव-गांव तक किया जाए। कहीं ैसा न हो कि जानकारी के अभाव में अनेक प्रतिभाएं सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित न हो जाए।