पन्ने प्रसुन्न के

स्वयंसेवक की चाय का तूफान तो मोदी-संघ दोनों को ले उड़ेगा…

राम मंदिर..राम मंदिर की रट लगाते लगाते उम्र पचास पार कर गयी,आंदोलन किया...सड़क पर संघर्ष  किया । देश भर के युवाओं को एकजुट किया । कार सेवा के लिये देश के कोने कोने से सिर्फ साधु संत ही नहीं निकले बल्कि युवा भी निकले...और आज जब चुनाव में विकास के बदले झटके में फिर राम...

बीमार सरकारी इलाज और लूट पर टिका प्राइवेट इलाज …शर्म क्यों नहीं आती ?

तो खबर अच्छी है। दिल्ली के शालीमार बाग के जिस मैक्स हॉस्पीटल ने जीवित नवजात शिशुओं को मरा बता दिया था, उसका लाइसेंस दिल्ली सरकार ने आज रद्द कर दिया। और दो दिन पहले हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम के उस फोर्टिस हॉस्पीटल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी, जहां इलाज ना देकर लाखों...

बिगड़ी तबियत….चाय की चुस्की ….तो चाय की प्याली का तूफान थमे कैसे ?

हैलो....जी कहिये...सर तबियत बिगड़ी हुई है तो आज दफ्तर जाना हुआ नहीं...तो आ जाइये..साथ चाय पीयेंगे....सर मुश्किल है। गाड़ी चलाना संभव नही है। आपने सुना होगा...अभी से पांव के छाले न देखो/ अभी यारो सफर की इब्दिता है। वाह । अब ये ना पूछियेगा किसने लिखा। मैं मिजाज की बातकर...

चाय के प्याले से कहीं ज्यादा तूफान है चाय के साथ बात में

चाय की केतली से निकलता धुआं...और अचानक जवाब हमारी तो हालत ठीक नहीं है । क्यों इसमें आपकी हालत कहां से आ गई । अरे भाई पार्टी तो हमारी ही है। और जब उसकी हालत ठीक नहीं तो हमारी भी ठीक नहीं । यही तो कहेंगे । ठीक नहीं से मतलब । मतलब आप खुद समझ लीजिये । क्यों गली गली..बूथ...

बदलती सियासी बिसात में संघ परिवार की भी मुश्किलें बढ़ी हैं

प्रधानमंत्री मोदी के सामने जिस दौर में राजनीतिक चुनौती लेकर राहुल गांधी आ रहे हैं, उस दौर का सच अनूठा है क्योंकि संघ के प्रचारक से पीएम बने मोदी के ही दौर में संघ परिवार का एंजेडा बिखरा हुआ है। संघ से जुड़े पहचान वाले स्वयंसेवक अलग थलग है। वहीं इंदिरा गांधी की तर्ज पर...

बच्चों के लिये कौन सा भारत गढ़ रहे हैं हम ?

दूसरी में पढ़ने वाले प्रघुम्न की हत्या 11वीं के छात्र ने कर दी। और हत्या भी स्कूल में ही हुई। प्रद्युम्न पढ़ने में तेज था। हत्या का आरोपी 11वीं का छात्र पढ़ने में कमजोर था। परीक्षा से डरता था। यानी हत्या की वजह भी वजह भी स्कूल में परीक्षा का दवाब ही बन गया। तो कौन सी...

किसे फिक्र है दिल्ली की हवा में घुले जहर की

2675 करोड 42 लाख रुपये । तो ये देश का पर्यावरण बजट है । जी पर्यावरण मंत्रालय का बजट।  यानी जिस देश में प्रदूषण की वजह से हर मिनट 5 यानी हर बरस 25 लाख से ज्यादा लोग मर जाते है उस देश में पर्यावरण को ठीक रखने के लिये बजट सिर्फ 2675.42 हजार करोड हैं । यानी 2014 के लोकसभा...

नोटबंदी के दिन कालेधन पर सत्ता-नेता दिल बहलायेंगे !

2008 से 2017 तक। यानी लिंचेस्टाइन बैंक के पेपर से लेकर पैराडाइज पेपर तक।इस दौर में पिछले बरस पनामा पेपर और बहमास लीक्स। 2015 में स्विस लीक्स। 2014 में लक्जमबर्ग लीक्स। 2013 में आफसोर लीक्स। 2011 में एचएसबीसी पेपर। 2010 में विकिलीक्स। और 2008 में लिंचिस्टाइन पेपर। यानी...

गैर बराबरी की रोटी पर बराबरी का वोट ही है लोकतंत्र?

जो 60 साल में नहीं हुआ वह 60 महीने में होगा। कुछ इसी उम्मीद के आसरे मई 2014 की शुरुआत हुई थी। और 40 महीने बीतने के बाद अक्टूबर 2017 में राहुल गांधी गुजरात को जब चुनावी तौर पर नाप रहे हैं तो अंदाज वही है जो  2013-14 में मोदी का था। तो क्या इसी उम्मीद के आसरे गुजरात में...

विकास की परिभाषा बदलने के लिये खड़ा हुआ है गुजरात का युवा

महंगी शिक्षा-बेरोजगारी के सवाल ने जातियों को एकजुट कर गुजरात चुनाव में बिछा दी है नई बिसात गुजरात चुनाव में सड़कों पर अगर युवा नजर आने लगे हैं। तो उसके पीछे महज पाटीदार, दलित या ओबीसी आंदोलन नही है। और ना ही हार्दिक पटेल,अल्पेश या जिग्नेश के चेहरे भर है । दरअसल गुजरात...

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  • Manthan
    Manthan

Cartoon by V.K. Ogale

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