खिलाडिय़ों को लाना होगा संदेह के घेरे से बाहर

भारत में खेलकूद की गतिविधियां लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही हर प्रतियोगिता में मुकाबला कड़ा होता जा रहा है। जय-पराजय के बीच अंतर कम होता जा रहा है। सभी खिलाड़ी मैच को या फिर स्पर्धा को अपने नाम या अपनी टीम के नाम करना चाहते हैं। खेलकूद में यह संभव नहीं है कि प्रतियोगिता में शामिल सभी टीम या खिलाड़ी विजयी हो जाए। संचार के अत्याधुनिक साधन के कारण सभी जागरूक खिलाडिय़ों के लिए एक समान सुविधा, खेल समग्री, प्रशिक्षक आदि उपलब्ध है। केन्द्र सरकार के साथ राज्य सरकारों द्वारा खिलाडिय़ों को दिये जाने वाले सम्मान के अलावा मकान, वाहन, नौकरी के साथ-साथ नकद राशि के कारण अब खेलों के प्रति खिलाडिय़ों तथा अभिभावकों का लगाव बढ़ गया है। खेलों की दुनियां में अब पहले जैसे बात नहीं रही। अब प्रतिस्पर्धा का जमाना है जिसके माध्यम से खिलाड़ी आत्मनिर्भर बनता है।

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प्रत्येक अभिभावक अब यही चाहते हैं कि उसकी संतान के लिए खेल जीवन यापन का साधन बन जाए। इन सब परिस्थितियों ने कुछ खिलाडिय़ों, प्रशिक्षकों को आत्मघाती कदम उठाने के लिए बाध्य किया है। एक समय था जब विश्व में किसी खिलाड़ी द्वारा नियम विरुद्ध जाकर जीत हासिल करने को बहुत बुरा माना जाता था। ऐसे खिलाडिय़ों/टीम के बारे में जानकारी होने के बावजूद उनके विरुद्ध ठोस कार्यवाही नहीं की जा सकती थी। लेकिन समय के परिवर्तन के साथ-साथ नये वैज्ञानिक शोध, कानून के माध्यम से खिलाडिय़ों की ऐसी गतिविधि पर रोक लगाये जाने की परंपरा शुरु हुई। संसार में खेल गतिविधियों के अधिकृत, व्यवस्थित संचालन करने वाली संस्था अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने इस दिशा में कठोर कदम उठाये हैं। मानव शरीर में असामान्य ऊर्जा लाने के लिए प्रतिभागियों द्वारा अरसा पहले ”अमनीटा मुस्कादियाÓÓ ”एनबोौलिक स्टेरोइड्सÓÓ ”टेस्टोस्टेरोनÓÓ ”मेथांड्रोस्टोनोलोनÓÓ ”निकोटिनिल टारट्रेटÓÓ आदि लिया जाता रहा है। स्टीम्युलेट जिसमें काफीन, कोकीन, एंफेटेमाइन, मोडाफिनिल और एथेड्राइन पाये जाते हैं इसका चलन बड़ी तेजी के साथ 21 वीं सदी के आरंभ से होने लगा है। खिलाडिय़ों की इस तरह के व्यवहार के लिए वल्र्ड एंटी डोपिंग एजेंसी 2004 से गंभीरता से कार्य कर रही है।

अब बाकायदा उन दवाईयों के नाम सार्वजनिक कर दिये गये हैं जो कि प्रतिबंधित दवा के अंतर्गत आते हैं तथा जिनका उपयोग वर्जित है। भारतीय खेल जगत में भी इस तरह के दवाईयों/इंजेक्शन का उपयोग बढ़ता जा रहा है यह बेहद चिंता का विषय है। अभी हाल ही में एक रिपोर्ट ने भारतीय खेल जगत को फिर से शर्मसार कर दिया है। भारत विश्व के टॉप 10 देशों में शामिल है जहां पर खिलाड़ी प्रतिबंधित दवा का इस्तेमाल करते हुए पकड़े गये हैं। इनमें एथलेटिक्स के 21, भारोत्तोलन तथा शक्तितोलन में 14-14, कबड्डी में 59,कुश्ती में 05 जबकि एक्वेटिक्स (तैराकी से संबंधित), शरीर सौष्ठव, हैंडबाल, पैरा एथलेटिक्स, टाईक्वांडों, व्हालीबाल में एक-एक खिलाड़ी दोषी पाये गये हैं। उपरोक्त 69 खिलाडिय़ों के अनैतिक कार्य ने भारत में गलत राह से विजय प्राप्त करने वालों की पोल खोल दी है। प्रतिबंधित दवा के प्रयोग की रोकथाम के लिए खेल से जुड़े हुए प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं आगे आना होगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर से लेकर ग्रामीण अंचल तक के प्रशिक्षण के दौरान इसके दुष्परिणाम से अवगत कराने की जिम्मेदारी हम सबकी है। भारतीय ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों के द्वारा इस तरह की घटना को रोकने के लिए और अधिक उचित एवं कारगर कदम उठाये जाने की आवश्यकता है अन्यथा ऐसे प्रकरण के प्रकाश में आने से ओलंपिक संघ स्वयं संदेह के घेरे में माना जायेगा।