खिलाडिय़ों के लिए साबित होगी मील का पत्थर

खेल की अपनी दुनियां होती है। इसमें भाग लेने वालों की सोच अलग होती है। जीवन में सफलता पाने के लिए हर किसी को खिलाड़ी होना चाहिए। खेल अनुशासन और समय की पाबंदी को सीखाता है। शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने का यह नायाब तरीका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन वाली केन्द्र सरकार ने पूरे देश में ”खेलो इंडियाÓÓ प्रोजेक्ट के माध्यम से देश के प्रत्येक बच्चों, किशोरों व युवाओं को किसी न किसी खेल से जुडऩे का आव्हान किया है। साथ ही ग्रामीण अंचल की खेल प्रतिभाओं को बिना किसी पहुंच या कोशिश के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया है।

Advertisement

भारत के खेल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राज्यवद्र्धन सिंह राठौर को प्रधानमंत्री ने खेल को जन-जन तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी दी है। ओलंपिक पदक विजेता होने के नाते खेलों के प्रति अपने समर्पण और आगे बढऩे आवश्यक मार्गदर्शन की जानकारी रखने वाले खेलमंत्री के लिए खेलो इंडिया एक बड़ी चुनौती है। राज्यवद्र्धन सिंह राठौर के नेतृत्व में भारतीय खेल जगत के इतिहास में पहले खेलो इंडिया स्कूल गेम्स का आयोजन 31 जनवरी से 8 फरवरी 2018 तक नई दिल्ली में हुआ। इसमें ग्रामीण अंचल के खिलाडिय़ों ने अद्भुत प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक प्राप्त कर अगले पांच वर्षों तक 5 लाख रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति प्राप्त करने के हकदार बने। खेलो इंडिया के प्रथम संस्करण से स्पष्ट हो गया कि शहरी भारत के साथ-साथ ग्रामीण भारत में योग्य, प्रतिभा संपन्न, उदयीमान खिलाडिय़ों की कोई कमी नहीं है। केन्द्र सरकार की ऐसी विकास उन्मुख नीति से प्रभावित होकर छत्तीसगढ़ के घोर नक्सली प्रभावित बीजापुर जिले के प्रशासनिक प्रमुख कलेक्टर डॉ. अयाज तंबोले ने एक ठोस कदम उठाया। सिर्फ आठ माह पहले यहां के मिनी स्टेडियम में 240 विद्यार्थियों ने 10 खेल में प्रशिक्षण प्रारंभ किया। जिनमें जुडो, कराते, व्हालीबॉल, बॉस्केटबॉल, हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स,तीरंदाजी आदि शामिल है। इन खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देने के लिए शारीरिक शिक्षा में सर्टिफिकेट, ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं की सेवाएं ली। बाद में स्पोटर््स अथारिटी ऑफ इंडिया (साई) के कोच से भी मदद लेने की योजना है। शुरुवाती दौर में प्रशिक्षित कोच के अभाव में भी इन 240 खिलाडिय़ों में से 17 खिलाडिय़ों ने राष्ट्रीय तथा 40 ने राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया। चार खिलाडिय़ों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त किया। अब सॉफ्टबॉल के दो खिलाडिय़ों का चयन अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा के लिए हुआ है।
बीजापुर खेल अकादमी की शुरुवात करीब एक वर्ष पूर्व हुई थी अब तक की उपलब्धि का श्रेय छग के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ खेल मंत्री, युवा कलेक्टर डा. अजाज के व अन्य मददगार अधिकारियों, खेल विशेषज्ञों को जाता है। छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है कि करीब 180 एकड़ भूमि पर यहां सर्वसुविधायुक्त खेल अकादमी की स्थापना की जाने वाली है। आगामी 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगे। नया राज्य बनने के साथ ही साथ 1 नवम्बर 2000 को इस प्रदेश के खिलाडिय़ों ने जिस तरह के प्रोत्साहन की उम्मीदराज्य व केन्द्र सरकार से की थी वह निरंतर फलीभूत हो रही है लेकिन बीजापुर स्पोटर््स एकेडमी के विस्तार से छत्तीसगढ़ के खेल व खिलाडिय़ों का एक और सपना पूरा होने जा रहा है। इस अकादमी में आधुनिकतम खेल सामग्री, उत्कृष्ट प्रशिक्षक उपलब्ध होंगे। खिलाडिय़ों को समयबद्ध ढंग से अध्यापन , भोजन, प्रशिक्षण दिया जाएगा। 37 वें राष्ट्रीय खेलों को दृष्टिगत रखते हुए यह अकादमी खेल के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के लिए मील का पत्थर साबित होगी।