हमारे देश में 2026-युवा ओलंपिक,2030-एशियाड और 2032-ओलंपिक खेलों के आयोजन का दावा पेश

दिसम्बर 2017 में भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष पद पर नरिन्द ध्रुव बत्रा की ताजपोशी के बाद हमारे देश के खेल संघों के कार्यप्रणाली में परिवर्तन आया है। भारत के विभिन्न केल संगठनों ने गोल्ड कोस्ट में संपन्न 21 वें राष्ट्रमंडल खेलों के लिए जिस तरह खिलाडिय़ों का चयन किया वह इस तथ्य की पुष्टि करता है। भारतीय खिलाडिय़ों ने 15 खेलों में भाग लिया इसमें सायकलिंग, बॉस्केटबॉल, व्हालीबॉल , जिम्नास्टिक, हॉकी , लॉन बाल्स, तैराकी को छोड़कर कुश्ती, निशानेबाजी, मुक्केबाजी, बारोत्तोलन, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, पैरास्पोटर््स, एथलेटिक्स में कोई न कोई पदक प्राप्त किया। कुश्ती एक ऐसा खेल रहा जिसमें शामिल 12 खिलाडिय़ों में से सभी ने कोई न कोई पद जीता है।
कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि भारत के नये ओलंपिक संघ ने पहली परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। उनके नेतृत्व व मार्गदर्शन में भारत के अन्य खेल संघों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने खेलों के लिए निष्पक्ष/उपयुक्त खिलाडिय़ों का चयन किया। इस बार भारत के खेल मंत्रालय ने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भेजे जाने वाले प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों की कांट-छांट की। स्वस्थ चयन प्रक्रिया के हिसाब से यह सरकार का सराहनीय कदम रहा। इससे ओलंपिक संघ के महासचिव को दिये गये अधिकार पर आंशिक रोक लगा। सही व्यक्ति को ऐसे खेल आयोजनों में भेजने के लिए केन्द्र सरकार को ऐसे कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं इससे ओलंपिक संघ के अधिकृत व्यक्ति द्वारा खेल से जुड़े व्यक्तियों के अलावा अन्य किसी व्यक्ति को मौका दिये जाने की परंपरा पर रोक लगेगी। राष्ट्रमंडल खेलों में 66 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर रहने वाली भारतीय टीम के खिलाडिय़ों और ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों में अभूतपूर्व उत्साह का संचार हो गया।
भारत की इस उपलब्धि के पश्चात ही अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डॉ. थामस बक भारत के दौरे पर आये। आत्मविश्वास से भरे हुए भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष नरिंदर ध्रुव बत्रा ने उनके साथ हुई प्रेस कांफ्रेंस में इस बात की घोषणा की कि भारत 2026 के युवा ओलंपिक, 2030 के एशियाई खेल और 2032 के ओलंपिक खेलों के मेजबानी के लिए दावा प्रस्तुत करेगा। इस तरह की घोषणा से भारतीय खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार हमारे देश में खेलों को लोगों तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाये हैं। ”खेलों इंडिया व टापÓÓ दो ऐसी योजना है जिसके माध्यम में भारत के महानगरों, शहरों और गांवों के कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हमारे देश का नाम रौशन करने के लिए सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही भारत में एक नये खेल संस्कृति का उदय होने जा रहा है। केन्द्र सरकार व खेल मंत्री लेफ्टि.कर्नल राज्यवद्र्धन सिंह राठौर की मंशा के अनुरूप भारत में खेलों को बढ़ावा देने के लिए नये प्रोजेक्ट के साथ ही विश्व स्तरीय खेल स्पर्धा के आयोजन की जरूरत है। भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष ने सही समय पर सही कदम उठाया है। आज भारत सरकार जिस खेल नीति को अपना रही है उसका परिणाम 2024, 2028 के ओलंपिक खेलों में स्पष्ट दिखाई देगा। 2026  के युवा ओलंपिक के आयोजन के हमारे देश में न सिर्फ अधोसंरचना का निर्माण होगा। बल्कि अत्याधुनिक खेल सामग्री, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध होगी। केन्द्रीय खेल मंत्री ने डॉ. थामस बक के साथ भारत में एडवांस प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और समाज में खेलों के महत्व की चर्चा की। खेल प्रशिक्षकों की उपलब्धता और खेल के दौरान विज्ञान के महत्व की जानकारी के लिए अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक संघ मदद करने को आगे आता है, तो इससे भारत में खेलकूद की दुनियां को नया आयाम मिलेगा।