क्रिकेट का रोमांच इन दिनों सिर चढ़कर बोल रहा है। टी-20 ने इस खेल को और अधिक लोकप्रिय बना दिया है। दे दनादन की तर्ज पर टी-20 में करीब 240 गेंद के द्वारा 300 से अधिक रनों की बौछार आम बात है। त्रिकोणीय मुकाबले के पहले मैच में श्रीलंका -भारत ने 231 गेंद में 10 विकेट खोकर 349 रन बनाये। तीसरे मैच में बांग्लादेश -श्रीलंका ने 429 रन 11 विकेट 236 गेंद पर बनाये। पांचवे मैच में भारत-बांग्लादेश के बीच हुए मुकाबले में 240 गेंद पर 335 रन 9 विकेट गवाकर बनाये गये। फायनल में भारत-बांग्लादेश ने 240 गेंद पर 14 विकेट खोकर 334 रन बनाये। (इन आंकड़ों में तो बाल, वाइड बाल शामिल नहीं है।) इस तरह कई मुकाबलों का औसत 240 गेंद में लगभग 340 से 360 रन आ रहा है। दर्शक चाहे स्टेडियम में हो या घर पर टीवी के सामने हो उन्हें तो रन बनने विकेट गिरने और कैच पकड़ते हुए देखने में आनंद आता है। याने तीन से चार घंटे पलक झपकते ही निकल जाते हैं। टाइम पास और पैसा वसूलने का दर्शकों के दृष्टिकोण का इससे बड़ा कोई तरीका नहीं। जब क्रिकेट की शुरूआत हुई तो उसके जन्मदाताओं ने यह सोचा भी नहीं होगा कि क्रिकेट का खेल इस प्रकार का हो सकता है जिसमें तकनीक, कलात्मकता का कोई महत्व नहीं। क्रिकेट को भद्र लोगों का खेल कहा जाता था याने कोई गेंद अगर ऑफ स्टंप पर आ रही है तो बल्लेबाज उसे ऑफ साइड में ड्राइव, कवर ड्राइव, कट ही करेगा। भद्रता इसी में था जब गेंद लेग स्टंप या उसके बाहर हो तो बल्लेबाज पुल, हुक, फ्लिक या स्वीप करे। अब इस खेल के अविष्कारक जिंदा होते तो कहते क्रिकेट का स्वरूप ऐसा बदल जाएगा यह हमने सोचा भी नहीं था।

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18 मार्च की शाम-रात को भारत व बांग्लादेश की टीमों के बीच त्रिकोणीय चैम्पियनशिप का फायनल हुआ। वह भी इसी सच्चाई को उजागर करती है। बांग्लादेश ने 166 रन बनाए। जवाब मं भारत ने 168 रन बना लिए। लेकिन ये रन कैसे बने यह बेहद दिलचस्प है। भारत को अंतिम समय में जीत के लिए 2 ओवर में 34 रन चाहिए थे। क्रीज पर बल्लेबाजी के लिए दिनेश कार्तिक मौजूद थे। रूबेल के गेंद की और पहली गेंद पर 6, दूसरी पर 4, तीसरी पर 6, चौथी में दो, पांचवीं में कुछ नहीं, छठी में 4 इस तरह एक ही ओवर में कार्तिक ने 22 रन निकाले। सौमय सरकार ने 20वें ओवर की पहली गेंद वाइड, फिर अधिकारिक पहली गेंद पर विजय ने कोई रन नहीं, दूसरी में एक रन लिया, तीसरी गेंद पर कार्तिक ने एक रन लिया, चौथी गेंद पर विजय ने 4 रन लिया और पांचवी गेंद पर वे आउट हो गए। अब जीत के लिए एक गेंद में 5 रन चाहिए थे। जब तक विजय का कैच लिया जाता कार्तिक छोर बदल चुके थे। अंतिम गेंद पर कार्तिक ने कवर बाउंड्री के उपर छक्का ठोंक दिया और भारत ने टी-20 में बांग्लादेश को लगातार 8वीं बार परास्त कर दिया। इसके साथ ही भारत ने निदहास ट्रॉफी को अपने नाम कर लिया। यह सच है जिन्होंने इस मैच के अंतिम दो ओवर को नहीं देखा उन्हें क्या पता किसी क्रिकेट मैच में किस हद तक उतार-चढ़ाव होता है। टी-20 में क्रिकेट का असली रूप भले ही विलुप्त होते जा रहा है परंतु किसी खिलाड़ी के व्यक्तिगत क्षमता का आंकलन आसानी से किया जा सकता है। एक विकेटकीपर के रूप में भारतीय टीम में महेंद्र धोनी के स्थापित होने के कारण भले ही दिनेश कार्तिक को अपनी प्रतिभा दिखाने का जौहर नहीं मिला। फिर भी आज उन्होंने अपनी सादगी, धैर्य और इच्छाशक्ति से यह सिद्ध कर दिया कि वे अतीत में एक अच्छे खिलाड़ी थे और परिस्थितिजन्य भारतीय टीम के लिए नहीं चुने जाने के बावजूद उन्होंने अपने अंदर के खिलाड़ी को अपने देश भारत के लिए आज भी जिंदा रखा है।