प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री रमन सिंह जी को खुला पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ में व्याप्त भय और आतंक के माहौल पर सवाल उठाए हैं. कारोबारी रिंकू खनूजा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के हवाले से उन्होंने राज्य में हुई कई घटनाओं और उस पर राज्य पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
अपने फेसबुक पेज पर आज जारी पत्र में भूपेश बघेल ने कहा है, “आपके मंत्री राजेश मूणत की सीडी के मामले में पूछताछ के बाद रिंकू खनूजा की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। टीवी चैनलों ने जिस तरह की तस्वीरें दिखाईं उससे लगता है कि आपकी पुलिस ने रिंकू खनूजा की मौत की जांच में लापरवाही बरती या शायद जानबूझकर लापरवाही बरती गई। क्या आपकी पुलिस फिर कुछ लीपापोती कर रही है? क्या हत्या को आत्महत्या बताने के लिए लीपापोती की जा रही है?”
पुलिस विभाग की लीपापोती पर उन्होंने कहा है कि इस बार की लीपापोती ठीक वैसी है जैसी कि झीरम कांड की जांच में रमन सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार ने की, प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले पर की और जैसी लीपापोती अंतागढ़ उपचुनाव में लोकतंत्र के चीरहरण के मामले में की।
राज्य की स्थिति को निशाना बनाते हुए उन्होंने लिखा है, “लेकिन इस समय सवाल आपकी पुलिस की लीपापोती और अपराधियों को बचाने की आपकी मंशा से बड़ा है रमन सिंह जी इस बार सवाल यह खड़ा हुआ है कि आपके राज में कोई है जो सुरक्षित बचा है?”

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उन्होंने कहा है पुलिसिया आतंक के बारे में तो जितना कहा जाए कम है, वह कभी मीना खल्को का बलात्कार कर उसकी हत्या कर देती है और उसे नक्सली ठहरा देती है। कभी मड़कम हिड़मे को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया जाता है, मीना खल्को और मड़कम हिड़मे के मामले तो सामने आ गए, लेकिन उन 27000 महिलाओं का क्या जो आपके राज में लापता हुईं और जिनका आज तक पता नहीं चला। कितनी शर्मनाक बात है कि बस्तर की बेटियों को हाईकोर्ट की शरण लेकर कहना पड़ता है कि हमें सुरक्षा बलों से बचाइए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार का भी मामला उठाया है और कहा है, “नक्सली हिंसा के नाम पर आपकी पुलिस ने आतंक का राज कायम कर लिया है। कभी सोनकू और बिजलू जैसे छात्रों को नक्सली बताकर मार दिया जाता है और नक्सली मुठभेड़ बताकर आपकी पुलिस इनाम ले जाती है। आपने जिन्हें सुरक्षा का जिम्मा दिया है रमन सिंह जी, वे आदिवासी महिलाओं का यौन शोषण करते हैं, आदिवासियों के घर जलाते हैं और सवाल उठाए जाने पर नेताओं के पुतले जलाते हैं”।

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प्रशासनिक आतंक पर भूपेश बघेल विधानसभा में भी सवाल उठाते रहे हैं, इस बार इसे दोहराते हुए उन्होंने कहा है कि सच तो यह है रमन सिंह ने शासन और प्रशासन को आतंक पैदा करने वाली मशीनरी में बदल दिया हैं। राजनीतिक विरोध अपनी जगह हैं लेकिन राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जिस तरह से फर्जी मामले दर्ज किए जा रहे हैं और जिस तरह से उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है, वह इतिहास में आपके 15 साल के शासनकाल के साथ हमेशा के लिए दर्ज रहेगा. चाहे वह मिच्चा मुथैया का मामला हो या मलकीत सिंह गैदू का।
अंत में उन्होंने कहा है, “आपके आतंक राज में तो पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता तक सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं रमन सिंह जी. ये आपने छत्तीसगढ़ के साथ क्या कर दिया? जनता ने आपको ऐसा प्रदेश तो नहीं सौंपा था? आप तो लोकतंत्र की खाल ओढ़े तानाशाह की तरह दिखने लगे हैं।”
छत्तीसगढ़के शांति पसंद नागरिकों के बारे में उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ का नागरिक इस भय और आतंक में जीने का आदी नहीं है. वह आपके आतंक से कांप रहा है. और इस डर का जवाब वह इस बार अपनी ताकत से देगा। बस चंद महीने और।