छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में बैगा आदिवासी बाहूल्य बोड़ला विकासखण्ड के ग्राम पंचायत तितरी गांव में सरकार की मदद से निर्माण किए गए कुंए से उस गांव की तस्वीर ही बदल गई है। ग्राम पंचायत तितरी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत लगभग 30 लोगों के लिए कुंए खुदवाएं गए हैं, चुकि यह गांव पहाड़ी क्षेत्रों के तलहटी में बसा हुआ है, इसलिए इस गांव में भूमिगत जल स्त्रोत आसानी से मिल जाता है, यही कारण है कि इस गांव में मनरेगा के तहत निर्माण किए गए कुंए उस गांव के लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। सौर सुजला योजना से किसानों को और नई उड़ान मिल गई है। लाभान्वित 30 किसानों में से 25 किसानों को सौर सुजला योजना का लाभ मिल गया है। अब किसानों की तरक्की का रास्ता और आसान हो गया है।

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सुदूर वनांचल इस तितरी गांव में पहले भी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के बहुत से कार्य पहले भी हुए है, जो लोगों को लाभ मिल रहा है पर कंुआ निर्माण का कार्य  ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने कि दिशा में मिल का पत्थर साबित हो रहा है। यहां के किसानों ने बताया कि कुंआ निर्माण के पहले सिंचाई के अभाव में केवल वर्षा पर निर्भर होकर खेती की जाती थी। बाकी साल के 8 महीने खेती के लिए कोेई भी काम नहीं था। जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तितरी गांव जंगल क्षेत्र में है। वहां के ग्रामीणों के पास बहुत छोटे-छोटे जमीन है, जिस पर वे खेती किसानी करते आए है। ग्राम पंचायत द्वारा इन्हें चिन्हांकित कर सिंचाई कूप निर्माण का कार्य स्वीकृत कराया गया। इस गांव के 38 हितग्राहियों का इस योजना का लाभ दिलाया गया है। प्रशासकीय स्वीकृति के मुताबिक 1.45 लाख कि लागत से 4 हितग्राही। प्रशासकीय स्वीकृति 2.140 लाख कि लागत से 16 हितग्राही। प्रशासकीय स्वीकृति  2.140 लाख कि लागत से 19 हितग्राही एवं प्रशासकीय स्वीकृति 2.20 लाख कि लागत से 10 हितग्राही सहित कुल 38 हितग्राहीयों को सिंचाई कूप निर्माण स्वीकृत किया गया।

प्रत्येक हितग्राहियों को कुंआ निर्माण कार्य में 63 हजार रूपए कि मजदूरी मिल गई। कुंऐ कि गहराई लगभग 38 से 40 फीट है। 2 फीट के 18 रिंग (सिमंेट का) लगाया गया, जिससे कुंए कि मजबूती और भी बड़ गई। 11वें रिंग यानी 22 फीट से ही पानी मिल गया। पर किसानों के लिए तो अभी इससे भी बड़ा सौगात इंतजार कर रहा था। जो कुंआ बनाते हुए इन्हंे मिल गया।

क्रेड़ा विभाग ने किसानों को बताया कि कुंए से पानी सुविधा जनक निकालने के लिये ’’सौर सुजला योजना’’ अंतर्गत 10 से 15 हजार रूपए में 3.50 लाख रूपए की लागत का सोलर पैनल दिया जाएगा जिसमें 3 एच.पी. का पंप पाईप सहित स्थापित कर 5 साल कि गैरेंटी भी दी जाएगी। यह योजना तो मानों जैसे फायदे का सौदा साबित हुआ। बिना देरी किए हुए 25 से अधिक किसानों ने इसका लाभ लिया और अपने कुंए में सोलर पैनल व पंप स्थापित करा लिया। अनुसूचित जाति के किसानों को मात्र 10 हजार रूपए एवं बाकी अन्य को 15 हजार रूपए में इस योजना का लाभ मिल गया। पंप लगाते ही साल भर खेतों के लिए पानी को अपनी सुविधानुसार उपयोग करने का मौका मिल गया। मोटर पंप से तो सुविधा मिल गई तथा इसका कोई बिजली बिल भी नहीं भरना होगा।
मिनका बाई पति संतलाल तितरी निवासी अपने कुंए निर्माण को तरक्की का साधन मानती है। वह कहती है कि जब मैंने 2.02 लाख कि लागत से अपने खेत में कुंआ बनवाया । मुझे इससे धान के मौसम के बाद साग सब्जी को लगाने एवं उड़द, मूंग और चना को लगाने के लिए पर्याप्त पानी मिल गया। इन फसलों को पास के ही बाजार में बंेच कर अच्छी आमदनी कमाई। क्रेड़ा विभाग से  पंप लगाने के बाद जैसे मैं आत्मनिर्भर हो गया। अब हम साग सब्जी भी लगाते है जिसे हम अपने घर में खा भी रहे है और पास के बाजार में बंेच कर नियमित आमदानी भी पा रहे है। अब हमारे पास साल भर के लिये काम है।
लक्ष्मण धुर्वे पिता बघेल धुर्वे  बताते है कि एक तो कुंआ बनाने से अच्छी मजदूरी मिली, घर में बारों माह पानी का साधन मिल गया। और तो और क्रेड़ा विभाग ने 10 हजार रूपये मंे ही 3 एच.पी. का पंप व सोलर पैनल लगा कर दे दिया। अब मैं अपने बाड़ी में और खेत में साल भर किसानी कर रहा हंू। कुंआ निर्माण ने तो जैसे मेरे हाथ में साल आमदानी का जरिया दे दिया।

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जगमोहन साहू पिता धरम सिंह अब साल भर अपने खेतों में फसल ले रहे है। जिस बाड़ी में पहले पानी के अभाव में कोई सब्जी नहीं लगा पाते थे आज वो साल भर बरबट्टी, टमाटर, लाल भाजी, भटा, मिर्ची, भिंडी, धनिया आदि कि फसल ले रहे है। साग सब्जी घर में तो  उपयोग हो ही रहा है लेकिन पैदावार इतना अच्छा है कि इसे पास के बाजार में बेंच कर अच्छी आमदानी कमा रहें है। ऐसे ही बहुत से किसानों को देखकर सहज ही मन में बात आती है कि आज के इस बढ़ती मंहगाई के जमाने में साधन एवं सुविधा विहीन लोगो को रोजगार गारंटी से जिवन में नया सहारा मिला है। हर हाथ को काम वो भी हमारे ग्रामीण किसानों को जिनके लिये यह कुंआ निर्माण किसी वरदान से कम नहीं है।