द्रोणाचार्य पुरस्कार के स्वाभाविक हकदार

पिछले 17 वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बॉस्केटबॉल ने राष्ट्रीय स्तर पर विजेता बनने का कीर्तिमान बनाया है। इस खेल का बालक-बालिका में चाहे सब जूनियर वर्ग हो, चाहे जूनियर वर्ग हो, सीनियर में पुरुष या महिला वर्ग हो सभी में छत्तीसगढ़ की किसी न किसी टीम ने 2001 से लेकर अब तक स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त किया है। इसका सीधा श्रेय बॉस्केटबॉल के जुझारू खिलाड़ी और प्रशिक्षक राजेश पटेल को जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले यहां के खिलाड़ी मध्यप्रदेश की ओर से राष्ट्रीय खेलों में भाग लेते थे और तब भी छत्तीसगढ़ के खिलाडिय़ों की बदौलत मध्यप्रदेश की टीम ने कई उपलब्धियां हासिल की।

राजेश पटेल के मेहनत, समर्पण, अनुशासन, कठोर अभ्यास की वजह से 2001 से लेकर अब तक 104 खिताब छत्तीसगढ़ की टीम ने जीते हैं। इसमें 69 गोल्ड मेडल शामिल है। ये सारे पदक राष्ट्रीय बॉस्केटबॉल चैम्पियनशीप, नेशनल गेम्स और फेडरेशन कप के माध्यम से प्राप्त हुए। 1980में खिलाड़ी के रूप में भिलाई इस्पात संयंत्र में नौकरी करने आए फिर यही बस गये। 1985 से उन्होंने उदयीमान, प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देने की जवाबदारी उठाई। छत्तीसगढ़ में बॉस्केटबाल को स्थापित, लोकप्रिय करने का सारा श्रेय राजेश पटेल को जाता है। इसमें भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारीगण और उनके मित्रो, पत्नि दोनों बेटों परिवार के अन्य सदस्यों का पूरा सहयोग मिला।
स्व. राजेश पटेल के अंदर बॉस्केटबाल को जन-जन तक पहुंचाने की चाहती थी। यही वजह है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आठ वर्ष के बच्चों से लेकर 20 वर्ष तक के युवाओं को बॉस्केटबाल का गुर सिखाते रहे। वे 1971 से इस खेल से जुड़े और 2018 मृत्युपर्यंत तक याने 47वर्ष तक तन-मन-धन सब कुछ न्यौछावर कर दिया। बॉस्केटबाल के प्रति उनकी दीवानगी इतनी थी कि पिछले दिनों उन्हें हार्ट अटैक आया परंतु सीखाना नहीं छोड़ा आखिरकार एक प्रतियोगिा में भाग लेने के लिए ट्रेन के सफर के दौरान उन्होंने अपना प्राण त्याग दिया। उनके अथक प्रयास से कई नौजवानों की जिंदगी बदल गई। जिन खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देते थे वे अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते थे।

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प्रशिक्षण लेने वालों के किसी के पालक साधारण परिवार, किसी के रिक्शा चालक, किसी के ऑटो चालक, कोई सफाई कर्मी, कोई होटल कर्मी, कोई मजदूर कोई सब्जी विक्रेता, कोई चाय बेचने वाला, कोई पान ठेले वाला आदि ऐसे वर्गों से आते थे। स्व. राजेश पटेल ने ऐसे जरूरतमंदों खेल प्रेमी बच्चों को जीने की राह दिखाई। उनके मार्गदर्शन में 85 महिला खिलाडिय़ों को भारत के विभिन्न संस्थानों में नौकरी मिली जिनमें 41 लड़कियां खेल कोटे से रेल्वे में भर्ती पा सकी। बॉस्केटबाल में उनकी अनगिनत उपलब्धि के कारण उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज हो चुका है। मुझे नहीं पता पिछले दिनों छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक अध्यक्ष व छग के मुख्यमंत्री माननीय रमन सिंह के नेतृत्व में हुई थी उसमें स्व. राजेश पटेल को श्रद्धांजलि दी गई या नहीं? ऐसा हुआ है तो ठीक, नहीं तो अभी भी समय नहीं निकला है। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ स्व. राजेश पटेल को द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए केन्द्र सरकार के खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ को सिफारिश कर सकती है। यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। प्रदेश के मुखिया माननीय डॉ. रमन सिंह स्वयं संवेदनशील हैं और मैं उम्मीद करता हूं कि वे लाखों खेल प्रेमियों की भावना का ख्याल रखते हुए वर्ष 2018 के द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए स्व, राजेश पटेल के नाम की पुरजोर सिफारिश करेंगे।