विशेष आलेख : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के बस्तर प्रवास के संदर्भ में है

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जो संकल्प से सिद्धि का सूत्र राष्ट्र को समर्पित किया है । यह सूत्र विश्व पटल पर न केवल भारवर्ष के सम्मान को संवर्धित करेगा अपितु इस सूत्र के माध्यम से नये भारत के, सक्षम भारत के, समर्थ भारत का मार्ग प्रशस्त हुआ ।

संकल्प से सिद्धि के सूत्र को समझने के लिए सर्वप्रथम हमें इसके अंर्तनिहीत भाव और शाब्दिक व्याख्या को समझना होगा । संकल्प शब्द में जो कल्प है उसका अर्थ धारणा होता है जब कल्प में ‘‘स” उपसर्ग जुड़ता है तो वह संकल्प बन जाता है ।

समकर्षेण धारणा – अवधारणा इति संकल्प

अर्थात् ऐसी धारणा जो उदार हो, व्यापक हो, सर्वनिष्ठ हो, जिसकी चरम परिणिति सिद्ध हो वही संकल्प है । गीता के नवें अध्याय के 23 वें श्लोक में एक सूत्र वाक्य आया है संकल्प प्रभाव कामस्य तत्वा संर्वाणशोषिताः श्री रामचरित मानस की दृष्टि से अगर हम संकल्प से सिद्धि के पथ को समझना चाहें तो कथा के अनुसार मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम जब विश्वामित्र जी के साथ यज्ञ रक्षा के लिए गए तो विश्वामित्र जी ने उन्हें अस्थियों के समूह को दिखाया और बताया कि समाज के कल्याण सुख संवर्धन के लिए यज्ञ करने के लिए ऋषि मुनियों की हड्डियों का वह ढेर है जिसे राक्षसों ने ऋषियों की नृशंस हत्या कर एकत्रित किया है । यह दृश्य देखकर प्रभु श्रीराम ने द्रवित होकर लोक कल्याण के लिए संकल्प लेते हुए कहा –

|| निश्चिर हीन करवं महिं भुज उठाये प्रण कीन्ह ||

                                || सकल मुनि के आश्रम जाहि जाहि सुख दीन ||

अपने इस संकल्प की सिद्धि के लिए मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम जी ने चरणबद्ध प्रारूप बनाया और उसे मूर्त रूप देने के लिए अयोध्या का राज वैभव, सुख सुविधाओं का परित्याग कर निशाचरी आसुरी शक्ति को निर्मूल करने के लिए अपने संकल्प सिद्धि के लिए सबसे पहले उन्होंने अपने संकल्प सिद्धि का पहला पत्थर गंगा तट पर रखा । समाज का एक ऐसा वर्ग जो तत्कालीन दौर में सामाजिक उपेक्षा का हलाहल पी रहा था उसे आत्मीय स्नेह देकर उस केंवट की सामाजिक प्राण प्रतिष्ठा की और एक बहुत बड़े वर्ग का समर्थन प्राप्त किया । उसके पश्चात बीहड़ जंगलों में रहने वाली शबर जाति की भीलनी शबरी के आंगन पहुंच कर वनवासी परिवेश में रहने वाले एक बहुत बड़े समुदाय की सद्भावना और समर्थन प्राप्त किया। अपने संकल्प के सिद्धि के लिए प्रभु श्रीराम ने भोगवादी हिंसक आसुरी संस्कृति के विरूद्ध एक जनमत तैयार किया ।

Advertisement

प्रभु श्रीराम चन्द्र जी ने अपने संकल्प की सिद्धि के पथ पर बालि के भय के रूप से समाज को मुक्त किया । सुग्रीव से मित्रता की, अंगद हनुमान जैसे प्रबल पुरूषार्थ को सम्मान और स्थान देते हुए लंकाधि पति रावण का नाश कर राम राज्य की स्थापना की यह संपूर्ण सारांश त्रेता युग के संकल्प से सिद्धि के पथ का है। देश काल परिस्थितियों में घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है पर पात्र परिवर्तित होते रहते हैं । आज राष्ट्र में राम राज्य की स्थापना के लिए पुनः संकल्प की आवश्यकता है और वही संकल्प प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राष्ट्र के समक्ष रखा है । उनके पावन संकल्प को सिद्ध करने के लिए राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का सहयोग सादर अपेक्षित है।

पिछले लोक सभा निर्वाचन पूर्व देश की जनता ने लोकतंत्र के पावन अनुष्ठान आम निर्वाचन के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को देश की बागडोर सौंपी थी वर्तमान केन्द्र सरकार ने जब केन्द्र में कार्यभार ग्रहण किया उस समय देश में नीतिगत अनिश्चितताओं का वातावरण था। सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक परिदृश्य विकास योजनाओं के अनुकूल नही थी, सवा करोड़ देशवासियों की उम्मीद की संवाहक के रूप में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनी तो आम जनता के मन मस्तिष्क में कुछ संशय के भाव थे कि क्या मोदी जी के कुशल नेतृत्व में देश आत्म सम्मान और आत्मनिर्भरता के अध्यायों को सृजित कर पाएगा ? क्या देश आर्थिक विषमता के मध्य सभी वर्गों के समग्र विकास के लक्ष्य की दिशा में हम आगे बढ़ पाएंगे ?

देश के नागरिकों के अंतर्मन में यह भी प्रश्न था कि क्या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारी विदेश नीति और कूटनीति हमें अपेक्षित सम्मान दिला पाएगी ? क्या देश का नेतृत्व सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को संरक्षित रखते हुए आमजनों के हृदय में एक नये विश्वास को जन्म दे पाएगा ? ऐसे अनेको अनेक प्रश्न देश के नागरिकों के मन में थे और आज यह हम सबके लिये हर्ष और गर्व का विषय है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने और उनके नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने अपने वर्तमान कार्यकाल में राष्ट्र के समग्र विकास की जो संकल्पना को साकार करने की बुनियादी स्तर पर पहल की है उसके सुखद परिणाम हमारे और आपके सामने है। माननीय मोदी जी के नेतृत्व में देश के नागरिकों के हृदय में इस बात को भी स्थापित किया ’’अच्छे दिन आने वाले है’’ यह केवल एक जुमला नही अपितु पावन संकल्प है।

संकल्प से सिद्धि के पथ पर आगे बढ़ते हुये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी छत्तीसगढ़ राज्य से 14 अप्रैल 2018 को केन्द्र सरकार की महत्वकांक्षी आयुष्मान योजना का शुभारंभ करने जा रहें हैं। इस योजना के तहत् देश के विभीन्न चयनित जिलों के विकास के लिये 28.75 करोड़ रूपये का बजट आबंटित किया गया है। निश्चित ही योजना के क्रियान्वयन से सदूर वनांचल ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को एक नयी दिशा मिलेगी। केन्द्र सरकार का यह निर्णय सुदूर ग्रामीण वनांचल क्षेत्रों में निवासरत अनुसूचित जाति और जनजाति के जनों के समग्र विकास के संकल्प को प्रदर्शित करता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकास के लिये समान रूप से कार्य कर रही है। जहां एक ओर आदर्श ग्राम योजना, प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नये वातावरण को गति मिली है वहीं शहरी क्षेत्रों के लिये स्मार्ट सिटी योजना के माध्यम से देश के विकसित होते हुए नये शहरों को सर्वसुविधायुक्त सुव्यवस्थित स्वरूप देने का महत्वाकांक्षी प्रयास फलीभूत हो रहा है।

रोटी, कपड़ा और मकान आम आदमी की तीन बुनियादी आवश्यकता है प्रधानमंत्री आवास योजना एक राष्ट्रीय महत्वाकांक्षी योजना है देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने महत्वाकांक्षी निर्णय के शुभारंभ में हमारे छत्तीसगढ़ प्रदेश को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री जी प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत यह संकल्प रखा है कि वर्ष 2022 तक सभी को आवास की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। वर्तमान केन्द्र सरकार के कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक उपलब्धि है यह भी उल्लेखनीय है कि हमारा प्रदेश प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन की दिशा में लक्ष्य प्राप्ति के लिये माननीय मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह जी के प्रयासो से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की केन्द्र सरकार ने अपने कार्यकाल में यह पूरी कोशिश की है कि देश का प्रत्येक नागरिक आत्मनिर्भर हो स्वावलंबी हो ’’प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’’ यह ऐसी योजनाएं है जिसका मूल उद्देश्य जन सामान्य का विकास है। केन्द्र सरकार की विचारधारा देश के महान आर्थिक चिंतक अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की विचाराधारा की संवाहक के रूप में कार्य कर रही है। भारत गरीबी मुक्त राष्ट्र बने देश का प्रत्येक नागरिक आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर और स्वावलंबी हो इसी भाव को लक्ष्य मानकर केन्द्र सरकार कार्य कर रही है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने पदभार ग्रहण करने के पश्चात स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने पहले उद्बोधन में देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए स्वच्छ भारत अभियान का आवाहन किया। यह अभियान देश के प्रत्येक नागरिक के हृदय में दायित्वबोध के भाव को जागृत करने में सफल रहा। स्वच्छता के प्रति देश के नागरिकों को जागरूक करने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर अनेक कार्यक्रम संचालित है। आज जन-जन में जो स्वच्छता के प्रति सजगता आई है। देश के प्रत्येक शैक्षणिक संस्थानों एवं प्रत्येक घरों में शौचालय निर्माण की पहल, और ओ.डी.एफ. पंचायत बनने के लिए आम जनों में जागरुकता प्रतिस्पर्धा ही नये भारत के निर्माण का संकेत है। इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि एवं स्वच्छ भारत अभियान को जाता है।

किसी भी राष्ट्र की युवा शक्ति उस राष्ट्र की ऊर्जा का अक्षय स्रोत होती है समर्पित, संकल्पित और स्वावलंबी युवा ही सक्षम राष्ट्र का निर्माण कर सकते है देश की केन्द्र सरकार ने इस तथ्य को स्वीकारते हुए ’’प्रधानमंत्री कौशल उन्नयन योजना’’ आरंभ की। इस योजना के माध्यम से देश के युवाओं को आत्मनिर्भर होने का अवसर प्राप्त हुआ। यह प्रसन्नता का विषय है कि केन्द्र सरकार की इस योजना से देश के युवाओं में एक नई चेतना का संचार हुआ है जिसके सुखद परिणाम हमें भविष्य में अवश्य रूप से प्राप्त होंगे।

राष्ट्र के विकास में राष्ट्र के नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और जब देश की जनसंख्या का लगभग आधा भाग हमारी मातृशक्ति का है ऐसी स्थिति में मातृशक्ति के समग्र के समग्र विकास के लिए समर्पित है |

लेखक : श्री धरमलाल कौशिक, भाजपा छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष है |