आत्मघाती साबित हुआ बदलाव का निर्णय

यह एशिया की एक प्रतिष्ठित चैंपियनशिप है। इसमें शामिल होने वाले देशों का अंतिम निर्णय संचालन समिति लेती है। 2018 के टूर्नामेंट के लिए भारत सहित 6 देशों को आमंत्रित किया गया था। इनमें आस्ट्रेलिया,इंग्लैंड, अर्जेन्टीना, आयरलैंड व मेजबान मलेशिया शामिल थी। 27 वीं प्रतियोगिता को जीतने का श्रेय आस्ट्रेलिया ने हासिल किया। आस्ट्रेलिया को विश्व में पहली, अर्जेन्टीना को दूसरी, भारत को छठी, इंग्लैंड को सातवीं, आयरलैंड को ग्यारहवीं तथा मलेशिया को 12 वीं वरीयता प्राप्त है। आने वाले नौ माह में हॉकी की 3 प्रमुख स्पर्धाएं होगी। अप्रैल 2018 में राष्ट्रमंडल खेल, अगस्त 2018 में एशियाई खेल और नवम्बर-दिसम्बर में हॉकी वल्र्ड  हॉकी लीग। इसके पश्चात 2020 में टोक्यो में ओलंपिक खेल होंगे। भारतीय हॉकी में इन दिनों बदलाव का दौर चल रहा है। नये कोच सोजार्ड मरीने भारतीय टीम में कुछ बदलाव चाहते हैं।  पिछले दो-तीन वर्षों से भारतीय हॉकी टीम की विश्व स्तरीय रैकिंग 5 या 6 या 7 पर अटकी हुई है। अब कोच के साथ भारतीय टीम के हितैषी चाहते हैं कि हमारी टीम कुछ ऐसा कर जाए जिससे हमारी रैकिंग नंबर एक की तरफ बढ़े । इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अजलान शाह कप के लिए भारतीय टीम में तीन ऐसे खिलाड़ी डिफेंडर मंदीप मोर, फारवर्ड सुमीत कुमार जूनियर तथा शैलेन्द्र लकड़ा को शामिल किया गया जिन्होंने भारत की तरफ से किसी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में पहली बार भाग लिया। अब परिणाम सामने है। भारत को 6 देशों में 5 वें स्थान पर संतोष करना पड़ा हमारी टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान कोई प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर सकी। लीग मुकाबले में हम सिर्फ मलेशिया को 5-1 से हरा सके। भारतीय टीम आस्ट्रेलिया से 2-4, अर्जेन्टीना से 2-3 और आयरलैंड से 2-3 से पराजित हुई जबकि इंग्लैंड के विरुद्ध मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। 5 वें से 6 स्थान के लिए हुए भिड़ंत में भारत ने आयरलैंड को अपनी पिछली पराजय का बदला लेते हुए  4-1 से पछाड़ा। हमारे खिलाडिय़ों ने टूर्नामेंट के दौरान 6 मैच में 16 गोल दागे और 13 गोल उन पर हुए। भारत की ओर से सर्वाधिक 4 गोल रमनदीप सिंह उपकप्तान ने किये। इसके अलावा अमित रोहीदास, गुरजंत सिंह, कुमार, शैलेन्द्र लकड़ा ने 3-3 गोल ठोके।

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मुख्य कोच सोजार्ड मरीने और हॉकी के शुभचिंतक भले ही नये खिलाडिय़ों के साथ टीम में बदलाव के लिए अजलान शाह कप प्रतियोगिता को अच्छा मंच मानते रहे हो लेकिन कुल मिलाकर प्राप्त परिणाम से निराशा ही हाथ लगी है। जब आने वाले नौ माह के अंदर तीन बड़ी स्पर्धाएं होने जा रही है तो इस तरह का आत्मघाती कदम नहीं उठाना चाहिए था। आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी तीन टीम ऐसी है जो पिछले 20-25 वर्षों से कभी भी विश्व रैकिंग में पहले सात से बाहर नहीं हुई। इसका अध्ययन, विश्लेषण करने पर पाया गया कि इन टीमों के साथ ही अर्जेन्टीना, बेल्जियम, इंग्लैंड की टीमों में बदलाव बहुत कम किए गये। चुने गये खिलाडिय़ों ने मिलकर करीब 100 से 150 तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में लगातार भाग लिया। टीम में बदलाव नहीं होने का सीधा लाभ खिलाडिय़ों के आपसी समझ को होता है। दुर्भाग्य से हमारे देश में यह इस परम्परा को अपनाया नहीं जाता। अजलान शाह कप जैसी प्रतियोगिता किसी भी टीम के लिए अभ्यास या ट्रायल करने का मंच नहीं है। 2020 के टोक्यो ओलम्पिक को ध्यान में रखते हुए इसी चैंपियनशिप से 18 सदस्यीय टीम की घोषणा की जानी थी। ये खिलाड़ी अजलान शाह कप, एशियाई खेल व राष्ट्रमंडल में जब मिलकर खेलते तब उसका परिणाम कुछ और होता। इससे खेल के दौरान एकदूसरे को पास देना,मिलकर आक्रमण व बचाव करने की ऐसी रणनीति तैयार होती कि भारतीय हॉकी के स्वर्णिम दिन याद आते। अजलान शाह कप टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम में बदलाव का निर्णय जिन लोगों ने भी लिया है अब उन्हें सतर्क हो जाना चाहिए और एशियाड व राष्ट्रमंडल खेल 2018 के लिए अभी से 18 सदस्यीय टीम चुन लेना चाहिए। ताकि खिलाड़ी नियमित अभ्यास शुरु कर सकें।