अनभिज्ञता के लिए कौन है जिम्मेदार?

खेल एक ऐसा माध्यम है जो किसी भी तरह के भेदभाव को दूर करता है। 1958-1960 के दौरान रंगभेद की नीति का विरोध खेलकूद ने सबसे प्रभावी तरीके से ऐसी नीति अपनाने वालों के विरुद्ध किया। इसकी वजह से 1960 से लेकर 1991 तक ऐसे कई देश, कई खिलाड़ी हुए जिनको विभिन्न देशों, समुदायों के लोगों ने स्वीकार नहीं किया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला को करीब 28 वर्षों तक जेल में ही रहना पड़ा। इस तरह की समस्या से जूझने की ताकत दुनियां के कई लोगों को खेल और खिलाडिय़ों ने दिया। आज के समय में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद रंग, वर्ण, शारीरिक बनावट आदि के भेदभाव को दूर करने में सफल रही है।

Advertisement

प्राचीन ओलंपिक खेलों का आयोजन ईसा पूर्व 776 से ओलंपिया में हुई और रोमी शासक थियोडोसियस के कार्यकाल में इसे ईसा बाद 393 में बंद कर दिया गया। करीब 12 सदी तक चले इन खेलों का उद्देश्य सिर्फ विजयी होना ही नहीं था परंतु यह आयोजन शरीर, दिमाग के व्यापक संतुलन का परिचायक था। इस तरह के खेलकूद स्पर्धा के बंद होने के करीब 1503 वर्षों बाद एक फ्रांसीसी बारोन पियरे डी कुबर्टीन के प्रयास से 1896 में एथेंस में 6 अप्रैल से फिर से चार वर्ष के अंतराल वाले खेल स्पर्धा का आयोजन शुरु हुआ  जिसे आधुनिक ओलंपिक खेल कहते हैं। आगे चलकर पूरी दुनियां के खेल और खिलाडिय़ों को एक सूत्र में पिरोने के लिए ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल 1896 के साथ-साथ शीतकालीन ओलंपिक खेल 1924, पैराओलंपिक खेल 1960 से, 1976 से पृथक रूप से पैराओलंपिक शीतकालीन खेलों का आरंभ हुआ। 1896 के आधुनिक ओलंपिक खेलों के आयोजन का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलकूद के माध्यम से समाज में एकता और शांति को बढ़ावा देना था। 6 अप्रेल 1896 से इसी लक्ष्य के साथ पहले आधुनिक ओलंपिक खेलों का आयोजन ग्रीस (यूनान) के एथेंस शहर में आरंभ हुआ। हालांकि इसकी नींव 23 जून 1894 को पेरिस के शहर सोरबोने में रख दी गई थी इसी वजह से 23 जून को पूरे संसार में ओलंपिक दिवस मनाया जाता है। इसदिन ओलंपिक दौड़ का आयोजन संपूर्ण विश्व में किया जाता है। 1987 में पहली बार 23 जून को ओलंपिक दौड़ का आयोजन किया गया। अब मौसम, वातावरण, परिस्थिति के मुताबिक 17 से 24 जून के बीच अंतर्राष्ट्रीय, ओलंपिक समिति द्वारा मान्यता प्राप्त देशों में 1.5 कि.मी. ओलंपिक दिवस दौड़ के साथ विभिन्न आयु वर्ग में 5 कि.मी. व 10 कि.मी. के दौड़ की गतिविधि होती है। इसका उद्देश्य पुरुष, महिला व बच्चों में इस तरह के खेल गतिविधि में शामिल होकर खेल को प्रोत्साहन देना और खेल भावना का मजबूती प्रदान करना है। बदलती परिस्थितियों और
समाज में खेल की महत्ता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ की साधारण सभा ने 2013 में एक प्रस्ताव पारित करके 2014 से 6 अप्रैल (जिस दिन आधुनिक ओलंपिक खेलों का आरंभ हुआ) को खेलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित कर दिया है। इसका उद्देश्य खेल के माध्यम से विकास और शांति को बढ़ावा देना  है। 2018 में भारत में 6 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस मनाये जाने के संबंध में किसी तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं है। भारतीय ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों द्वारा इस संबंध में आवश्यक एवं उचित दिशा निर्देश भारत के विभिन्न राज्यों को दिया जाना चाहिए था। छत्तीसगढ़ में इस संबंध में कार्यक्रम ओलंपिक संघ द्वारा या खिलाडिय़ों या खेल संघों की कोई गतिविधि हुई इसकी जानकारी नहीं है परंतु लगता है भारतीय ओलंपिक संघ ने इस दिवस को गंभीरता से नहीं लिया। भविष्य में इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब न हो सके।