Author: विनोद साव

विनोद साव के उपन्यास ‘चुनाव’ और फिल्म ‘न्यूटन’ में मिली समानता पर बहस

यह अचम्भा है कि विनोद साव के उपन्यास ‘चुनाव’ और फिल्म ‘न्यूटन’ में अद्बुत साम्य है. उपन्यास के लिखाक विनोद साव जब भिलाई के मिराज थिएटर में अपने एक मित्र के साथ फिल्म ‘न्यूटन’ देख रहे थे. तब फिल्म देखते हुए मित्र ने कहा कि ‘ये फिल्म तो आपके उपन्यास चुनाव से काफी कुछ मिलती है. तब विनोद जी भी दो दशक पहले लिखे अपने उपन्यास के घटनाक्रम को याद करते हुए गौर से फिल्म को देखने लगे. फिल्म ‘न्यूटन’ में नक्सल प्रभावित बस्तर- दण्डकारण्य के एक संवेदनशील मतदान केन्द्र का जिक्र है. वर्ष १९९७ में प्रकाशित विनोद साव...

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बारिश और दंगा

अब तो बारिश और दंगों का कोई भरोसा ही नहीं रहा. जब कभी भी बारिश हो जाती है और जहां कहीं भी दंगा. कामकाजी लोगों को हरदम ये खौफ रहने लगा कि न जाने कब बारिश हो जाए और न जाने कब दंगा. बच्चे तो हर साल बारिश में बहाने बनाकर स्कूल कालेज जाने से कन्नी काट लिया करते हैं लेकिन अब उन्हें बहाने बनाने के लिए दंगे भी खूब नसीब होते हैं. बस थोड़ी से कहीं कुछ अफवाह उड़ी नहीं कि स्कूल कालेज बंद. सरकार समझती है कि छुट्टियां कर देने से दंगों पर नियंत्रण होगा जबकि हमारे...

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Cartoon by V.K. Ogale

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