बारिश और दंगा

अब तो बारिश और दंगों का कोई भरोसा ही नहीं रहा. जब कभी भी बारिश हो जाती है और जहां कहीं भी दंगा. कामकाजी लोगों को हरदम ये खौफ रहने लगा कि न जाने कब बारिश हो जाए और न जाने कब दंगा. बच्चे तो हर साल बारिश में बहाने बनाकर स्कूल कालेज जाने से कन्नी काट लिया करते हैं लेकिन अब उन्हें बहाने बनाने के लिए दंगे भी खूब नसीब होते हैं. बस थोड़ी से कहीं कुछ अफवाह उड़ी नहीं कि स्कूल कालेज बंद. सरकार समझती है कि छुट्टियां कर देने से दंगों पर नियंत्रण होगा जबकि हमारे...

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