आना लक्ष्मी जी का व्यंग्यकार के घर

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‘क्या बोला लक्ष्मी जी अपुन का घर आएंगा ! वंडरफुल.. गाडेस लक्ष्मी हमारा घर विजिट करेंगा.  गाडेस लक्ष्मी यानी पइसा का गाडेस. वो इधर कू आएंगा ! जइसा नेता लोग अपना चुनाव क्षेत्र में आता वइसा. लेकिन लक्ष्मी जी अच्छा है वो हर साल आता. नेता लोगों जइसा नई जो पांच साल में एक बार आता. अपुन तो लक्ष्मी जी को वी.आई.पी. ट्रीटमेंट देंगा शरद जोशी का माफिक. उनका ग्रेंड वेलकम करेंगा जइसा नया कलेक्टर आने का टाइम जिला कचहरी में लोग करता. फिर अपुन का प्रोब्लम बताएंगा. अपना घर को हम वइसा ही डेकोरेट करेंगा जइसा साहब लोग मिनिस्टर के लिए सर्किट हाउस में करता. अपुन का बच्चा लोग उस दिन अच्छा वाला ड्रेस पहनेंगा जइसा स्कूल इंसपेक्टर का आने का दिन स्टूडेंट लोग पहनता. अपुन का वाइफ भी अच्छा मेक-अप करेंगा जइसा स्कूल का मैडम लोग करता.

मदर लक्ष्मी का वेलकम का खातिर अपुन बच्चा लोग को एक डिमोंसट्रेशन देंगा जइसा एजुकेशन आफिसर आने से पहले हेडमास्टर स्कूल का बच्चा लोगों को देता. हम अपना बच्चा लोगों को बोलेंगा कि ‘गाडेस लक्ष्मी का आने का टाइम में सब लोग खड़ा होना मांगता.’  फिर अपुन का वाइफ उनको दरवाजे में बुके देकर रिसीव करेंगा, बच्चा लोग ताली बजाएंगा. फिर सब लोग स्वीट आवाज़ में मदर लक्ष्मी का प्रेयर गाएंगा. उसके बाद अपुन जब बोलेंगा लक्ष्मी माता की..

‘जय’ अइसा अक्खा बच्चा बोलेंगा. फिर अपुन दूसरा बार चिल्लायेंगा ‘लक्ष्मी माता..

‘जिंदाबाद’ अक्खा बच्चा बोलेंगा. फिर अपुन तीसरा टाइम चिल्लायेंगा ‘लक्ष्मी माता..

‘अमर रहे’ अक्खा बच्चा बोलेंगा. उसका बाद लक्ष्मी जी को पूजा घर में ले जायेंगा. वहां सब लोग उनको एक एक हार पह्नायेंगा और प्रणाम करेंगा.’

‘जब लक्ष्मी जी सीट डाउन बोलेंगा तो सब लोग बैठ जायेंगा. फिर लक्ष्मी जी एक ब्यूटीफुल स्पीच देंगा, उस टाइम सब लोग सायलेंट बैठने का तो लक्ष्मी जी हैप्पी होएंगा और सबको आशीर्वाद देंगा, पइसा देंगा – लेकिन ख्याल रखने का कि स्पीच का बीच में कोई भी पइसा नई माँगने का.. नई.. पइसा तो क्या कुछ भी नई माँगने का. नई तो लक्ष्मी जी एंग्री हो जायेंगा तो सब लोग भूखा मरेंगा. फिर बाद में अपुन को नई बोलने का .. क्या ?

लक्ष्मी जी के विजिट का लास्ट आइटम होंगा घर का इंस्पेक्शन. तब सब लोग अपना अपना प्रोब्लम याद रखने का और लक्ष्मी जी को बताने का, उनको एप्लीकेशन देने का. लक्ष्मी जी जब इंस्पेक्शन चालू करेंगा तब अपुन का वाइफ उनको कीचन में ले जायेंगा और कीचन प्रोब्लम बताने का.  ये भी पाइंट-आउट करने का कि राशन दुकान में खाली दो रूपया किलों वाला चावल भर मिलने का और कुछ नई मिलने का. उधर सब गोलमाल होता और अपुन को बाकी राशन बाजार से ज्यादा दाम में लेना मांगता इससे अपुन का बजट बिगड़ता.  बच्चा लोग स्कूल का बारे में नई पूछने का, क्योकि स्कूल का प्रोब्लम सरस्वती माता का. उसमें लक्ष्मी माता का इंटरेस्ट नई. हाँ.. दूसरा कुछ है तो लक्ष्मी जी को पूछने का.

‘अपुन लक्ष्मी माता को अपना सैलरी, डी.ए., हाउस रेन्ट, इन्सेन्टिव और बोनस में सबका डिटेल्स बताएंग. इसमें से कुछ कंसीडर करेगा तो उनका मर्ज़ी.’

‘सो थैंक्यू सर.. अपने हमको पहले से इन्टीमेशन दिया कि ये डीवाली में लक्ष्मी माता यानी गाडेस लक्ष्मी अपुन का घर आएंगा. अब हम जाता है क्योंकि उनका वेलकम में बोत तैयारी करने का. गाडेस लक्ष्मी यानी पइसा का गाडेस.

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हिंदी व्यंग्य के सुस्थापित लेखक विनोद साव ने अनेक उपन्यास, कहानियाँ, संस्मरण और यात्रावृत्तांत लिखे हैं. उनकी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं. उनकी रचनाएँ हंस, पहल, वसुधा, अक्षरपर्व, ज्ञानोदय, वागर्थ और समकालीन भारतीय साहित्य में छपी हैं. उन्हें वागीश्वरी और अट्टहास सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं. वे उपन्यास के लिए ड़ा.नामवर सिंह और व्यंग्य के लिए श्रीलाल शुक्ल से भी सम्मानित हुए हैं. उनके नियमित स्तंभ का नाम रहेगा 'मैदान-ए-व्यंग्य'. लीजिए प्रस्तुत है उनकी पहली रचना 'बारिश और दंगा.'

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