क्याकिंग व कैनोइंग: साई सेंटर भोपाल ले जाने की तैयारी/ छग के खिलाडिय़ों के साथ अन्याय

साई के दुर्भाग्यपूर्ण कदम से सब स्तब्ध

9 जून 2011 को छत्तीसगढ़ में भारतीय खेल प्राधिकरण की शाखा रायपुर में शुरु हुई। यहां पर तीरंदाजी, जुडो, फुटबॉल, क्याकिंग तथा कैनोइंग और वाटर स्पोर्टस का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन सब खेलों में से क्याकिंग व कैनोइंग एक ऐसा खेल है जिसमें छत्तीसगढ़ के खिलाडिय़ों ने सीनियर नेशनल, जूनियर नेशनल, सब जूनियर नेशनल में सबसे अधिक पदक जीते हैं। 1 नवम्बर 2000 में राज्य निर्माण के साथ ही छत्तीसगढ़ में कैनोइंग और क्याकिंग खेल की ओर यहां की ओलंपिक समिति और इस खेल के राज्य स्तरीय समिति के पदाधिकारियों ने विशेष ध्यान दिया। राजधानी रायपुर में बूढ़ातालाब और तेलीबांधा में इस खेल में उत्सुक खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देने का दौर शुरु हुआ।
राज्य शासन के प्रोत्साहन के द्वारा क्याकिंग और कैनोइंग संघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश के खिलाडिय़ों की इस खेल के प्रति लगन, मेहनत  लगाव को देखते हुए बिना किसी प्रायोजक का इंतजार किए अपने ही संसाधन से खिलाडिय़ों को नौका, पतवार आदि जरूरी खेल सामग्री मुहैय्या कराया। शुरुवाती दौर में सुविधा उपलब्ध हो जाने के कारण छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों में उत्साह का संचार हो गया। उन्होंने प्रतिदिन लगातार कठोर अभ्यास करना आरंभ किया, नतीजा यह निकला कि हमारे प्रदेश के खिलाडिय़ों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना आरंभ कर दिया। क्याकिंग व कैनोइंग के प्रतिभागियों ने अपने खेल संघ के पदाधिकारियों को कभी भी निराश नहीं किया। देशी बोट और साधारण सुविधा के उपलब्ध होते हुए भी वे अपने स्वयं के, खेल संघ के पदाधिकारियों और अपने अभिभावकों के मापदंड में खरे  उतरे। 9 जून 2011 को रायपुर में भारतीय खेल प्राधिकरण के रायपुर केन्द्र की शुरुवात हुई। इसके बाद इस खेल के खिलाडिय़ों को व्यवस्थित और सटीक प्रशिक्षण साई के प्रशिक्षक द्वारा मिलने लगा। इसका सीधा लाभ हमारे खिलाडिय़ों को मिला और आज स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने सन् 2000 से लेकर अब तक सैकड़ों पदक राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर, जूनियर, सब जूनियर बालिका व बालक वर्ग में प्राप्त कर लिया है। कई खिलाडिय़ों को प्रत्येक वर्ष होने वाले राज्य खेल अलंकरण समारोह में सम्मानित किया जा चुका है। जनवरी 2018 में भोपाल में संपन्न 28 वीं सब जूनियर, जूनियर और सीनियर केनोई स्प्रिंट चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ के खिलाडिय़ों ने सीनियर वर्ग में 12 पदक जबकि जूनियर वर्ग में 4 पदक प्राप्त किया है। छत्तीसगढ़ की मामाप्रधान-देवकुमारी साहू की जोड़ी ने रजत, कौशल नंदिनी ठाकुर, गणेश यदु, मनसानी खान, पिंकी साहू, विजय दलेई ने कांस्य पदक जीता। इस तरह छग के खिलाडिय़ों ने 2011 झारखंड 2015 के केरला में संपन्न राष्ट्रीय खेलों में पदक प्राप्त किया था। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राजकुमार निषाद  अभी हाल ही में साई के कोच चुन लिये गए। इनके अलावा छग के दो खिलाडिय़ों का चयन अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा के लिए भारतीय दल में भी हुआ है। इस प्रकार जबकि क्याकिंग व कैनोइंग खेल में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान साई मुख्यालय नई दिल्ली से जो खबर आ रही है वह न सिर्फ छग के खिलाडिय़ों बल्कि छत्तीसगढ़ की जनता के लिए बेहद निराशाजनक है। कहा यह जा रहा है कि रायपुर स्थिति साई सेंटर को स्थानांतरित करके उसका भोपाल में विलय किया जा रहा है। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है। छत्तीसगढ़ के खिलाडिय़ों ने 2011 के पहले  भी जिस खेल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी उस खेल को अब रायपुर साई सेंटर में बंद किया जा रहा है। इस तरह के कदम के पीछे का कारण क्या है यह तो पता नहीं परंतु 36 वीं, 37 वीं राष्ट्रीय खेलों के आयोजन की निकटता देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यह छत्तीसगढ़ के संपूर्ण खेल जगत के लिए अन्यायपूर्ण निर्णय है।

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