छग के माटी कवि लक्ष्मणमस्तुरिया को भावपूर्ण श्रद्धांजलि: डॉ. महंत

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छत्तीसगढ़ के कला जगत में अपने गीतों के माध्यम से एक अलग पहचान बनाने वाले जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया का शनिवार सुबह 11 बजे दिल का दौरा पड़ने से दुःखद निधन हो गया। जनकवि मस्तुरिया के निधन पर छग प्रदेश इलेक्षन कैम्पेन कमेटी के चेयरमेन, पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री व सक्ती विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-35 के कांग्रेस प्रत्याषी डॉ. चरणदास महंत ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि एक बारगी यह अकल्पनीय सा लगा कि वे हमारे बीच नहीं रहे। उनसे काफी गहरे और पारिवारिक रिष्ते रहे हैं। लक्ष्मण मस्तुरिया ने चंदैनी गोंदा, छत्तीसगढ़ी फिल्म मोर छईहा भुईया के लिए गीत लिखे तो उनके अनेकों गीत आज भी लोगों के जेहन में गूंजते हैं। सर्वप्रचलित और प्रेम-भाईचारा एवं एकता को रेखांकित करने वाला गीत मोर संग चलव जी-मोर संग चलव गा… आज भी प्रासंगिक हैं।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और यहां की मिट्टी में रचे-बसे कला और कवयिों को एक मंच पर लाने का काम भी उन्होंने किया जो अविस्मरणीय रहेगा। सांस्कृतिक जागरण की एक नई यात्रा उन्होंने चंदैनी गोंदा से शुरू की। छत्तीसगढ़वासियों के दिलों व यहां के कला जगत में वे सदैव जीवित रहेंगे। डॉ. महंत ने बीते दिनों हरेली तिहार के दिन कोरबा के हसदेव तट पर स्थित मां भवानी मंदिर के समीप छग महतारी मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह मंे छग महतारी की आरती गीत के बीच विमोचन समारोह मंे उनके साथ बिताए पल को याद करते हुए भावुक मन से कहा कि छग के सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाली लक्ष्मण मस्तुरिया का मिला सानिध्य मुझे हमेषा अविस्मरणीय रहेगा।

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