भूपेश सरकार का पहला बजट अपरिपक्व, आर्थिक संकट की ओर प्रदेश-अमर अग्रवाल

0
65

पूर्व वित्त मंत्री और आर्थिक मामलों के जानकार अमर अग्रवाल ने किया विश्लेषण

प्रदेश में वित्त मंत्री रहे एवं आर्थिक मामलों के जानकार माने जाने वाले अमर अग्रवाल ने भूपेश सरकार के पहले बजट को अपरिपक्व और सिर्फ एक क्षेत्र विशेष का ही बजट बताया है। पूर्व मंत्री ने दलगत राजनीति से उपर उठते हुए कहा कि वर्तमान में ज़रूर किसानों का ध्यान रखा गया है लेकिन यह किसानों की समस्या का यह स्थाई समाधान नहीं है.इसके लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

आगे श्री अग्रवाल ने कहा कि यह बजट कांग्रेस सरकार ने अपने घोषणा-पत्र को पूरा करने और लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बनाया है और सरकार ने कर्ज माफी,धान बोनस समेत जो सब्सिडी और छूट का प्रावधान रखा है उससे निश्चित तौर पर विकास के अन्य काम प्रभावित होंगे।
बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आगे श्री अग्रवाल ने कहा कि बजट में कल्पना की गई है की हम आमदनी बढ़ा लेंगे लेकिन मेरा अनुभव है की आमदनी बढाने के लिए दीर्घकालीन योजनाएं बनाने होंगे। नई सरकार ने कर्ज माफ़ी के लिए जो १०,००० करोड़ रू का प्रावधान रखा है , २५०० प्रति क्विंटल धान खरीदी का, इससे निश्चित तौर पर दूसरे विभागों को मिलने वाले बजट में कटौती होगी जिससे निश्चित तौर पर रूटीन के कार्य प्रभावित होगा| वर्तमान में तो किसानों के बारे में सोचा गया है पर बाद में सरकार अपने सारे वादों से पलटेगी, और पलटना इनकी मजबूरी होगी.क्योंकि जो लोकलुभावन वादा करके यें आए हैं उसे शत् प्रतिशत पूरा करना संभव नहीं हैं.और इसकी शुरूआत भी इन्होंने कर दिया है,बिजली हाफ पूरा ना करके सिर्फ 400 यूनिट तक करके .राज्य की आर्थिक पहलुओं को बिना ध्यान रखे किए गए इन सारे प्रावधानों का दुष्परिणाम आने वाले तीन – चार साल छत्तीसगढ़ भुगतेगा।

एक विशेषज्ञ के रूप में आगे श्री अग्रवाल ने कहा कि बजट भाषण में कहा गया कि छत्तीसगढ़ के किसानों की आमदनी राष्ट्रीय औसत से कम है और इसके कारण कर्जा माफी और धान खरीदी रु. २५०० किया जा रहा है , लेकिन ये तत्कालिक उपाय हो सकता है पर स्थायी समाधान नहीं है| इस बात पर विचार करना चाहिए की किसान कर्ज़दार ही क्यों होता है , इस समस्या का समाधान खोजा जाना चाहिए ।

सीएम भूपेश बघेल जी ने आने वाले वर्ष 2019-20 में भी 2500 रु मूल्य पर धान खरीदी का जारी रखने का आश्वासन दिया है. अभी केंद्र सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 1700 रु है यानी 800 रु का बोनस राज्य सरकार द्वारा दिया जा रहा है और जब अगले साल केंद्र सरकार धान का समर्थन मूल्य बढ़ाएगी तब भी 2500 रु में धन खरीदी की जाएगी| जिससे की राज्य शासन द्वारा वादा किया गया 800रु.का बोनस 150 से 200 रु तक कम हो जायेगा। इस घोषणा से बड़ी चालाकी से पीछे हटने की कोशिश की गई है।

चुनावी घोषणा पत्र में कहा गया था बिजली बिल हाफ तो बिजली बिल हाफ करने की सीमा 400 यूनिट तक सीमित ही क्यूँ? इससे किसको लाभ होगा? हेल्थ और एजुकेशन का समाज में महत्वपूर्ण स्थान होता है वहीं हायर एजुकेशन जो भावी पीढ़ी का निर्माण करेगी,इन सब के लिए कहीं कोई सोच नहीं दिखाई देती.और स्वास्थ्य सेवाओं में तीन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के लिए 50 करोड़ अपर्याप्त हैं।

5 फूड पार्क के लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया गया पर क्रियान्वयन पर कुछ स्पष्ट नहीं किया गया।पूर्व में धमतरी में फ़ूड पार्क है जो सफल नहीं है. मेरा मानना है की पूर्व के अनुभव और सफल क्रियान्वयन के बारे में अध्ययन कर लेना चाहिए।

यह बजट आने वाले लोक सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है| इस बजट में छत्तीसगढ़ के आर्थिक स्थिति और उसके विकास के बारे में ध्यान नहीं रखा गया है | आगे का बजट केवल आंकड़ो में सजाया गया है और अगर बजट में आय बढ़ने की कोशिश नहीं की गई तो प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के सारे काम रुक सकते हैं।

अंत में श्री अग्रवाल ने भूपेश सरकार पर बिना कुछ किए वाहवाही लूटने का आरोप लगाते हुए कहा कि बजट में किसी नए कर का प्रावधान नहीं होना सिर्क एक लोक लुभावन वाक्य है। जी एस टी लागू होने के बाद नए कर की घोषणा करना राज्य शासन के अधिकार क्षेत्र में है ही नहीं, यह श्रेय लेने की एक कोशिश मात्र है |

ज्ञातव्य है कि अमर अग्रवाल पूर्ववर्ती सरकार में वित्त विभाग संभालने के अलावा काफी समय तक वाणिज्य कर विभाग भी अमर अग्रवाल के पास रहा है। और श्री अग्रवाल को जीएसटी मामले का काफी जानकार माना जाता है.पूर्व में जीएसटी से जुड़े मामलों में अमर अग्रवाल ने ही राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व किया है और केंद्रीय जीएसटी काउंसिल के प्रमुख सदस्य भी रहें हैं जिनके सुझाव पर जीएसटी में कई प्रमुख संशोधन भी किए गए है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here