सेस से जनता पर भार और सत्ता की रईसी

2014 में मोदी सरकार सत्ता में आई और जुलाई 2018 में जब देश में जीएसटी लागू हुआ उससे पहले तक जितने माद्यमों के जरीये सरकार ने सेस लिये, वह अपने आप में एक रिकार्ड है। क्योंकि जितने प्रोडक्ट या माध्यमों पर सेस लगाकर जनता पर बोझ डाला गया, वह अपने आप में ऐतिहासिक है और सेस के जरीये कमाई भी एतिहासिक है और सेस जो कहकर लगाया गया कि कहां खर्च होगा, उससे इतर कहां कहां खर्च हो गया ये अपने आप में ही ऐतिहासिक है। और अगर आंकडों के लिहाज से समझें तो बीते तीन बरस में सिर्फ सेस के जरीये सरकारी की कमाई 40 खरब से ज्यादा की हुई और खर्च 23 खरब ज्यादा नहीं हुआ। यानी सेस की 17 खरब से ज्यादा की रकम सरकारी खजाने में पहुंच गई। और इसे बरस दर बरस समझें तो सेस के जरीये 2014-15 में सरकार ने 8 खरब 91 अरब 17 करोड 20 लाख वसूली की। जबकि 2015 – 16 में सेस से वसूली बढ़कर 13 खरब 66 अरब 29 करोड  96 लाख रुपये हो गई । और बीते बरस यानी 2016-17 में सेस से सरकार को मिले 17 खरब 85 अरब 94 करोड 74 लाख रुपये। यानी इन तीन बरस में सेस के जरीये सरकार के खजाने में 40 खरब 43 अरब 41 करोड 82 लाख रुपये पहुंचे । पर ऐसा भी नहीं है कि सरकार ने सेस से कमाई सारी रकम अपने लिये रख ली। खर्च तो किया पर बचाया ज्यादा। क्योंकि 2014 -15 में कमाई होती है 8 खरब 91 अरब 17 करोड 20 लाख रुपये। और अलग अलग मदों में खर्च  होते है 5 खरब 77 अरब 65 करोड 60 लाख रुपये। यानी 3 खरब 13 अरब 51 करोड़ 52 लाख रुपये सरकार के पास बच जाते हैं। इसी तरह 2015 -16 में सेस लगाकर सरकारी खजाने में 13 खरब 66 अरब 29 करोड 96 लाख रुपये पहुंचते हैं। और अलग अलग मदो में सेस की रकम का उपयोग किया जाता है 7 खरब 15 अरब 65 करोड़ 88 लाख रुपये। यानी सरकारी खजाने में सेस की रकम जो बच जाती है, वह 6 खरब 50 अरब 64 करोड 8 लाख रुपये होती है। इसी तरह बीते बरस यानी 2016-17 में जीएसटी सेस से सरकार की कमाई होती है या कहें जनता देती है 17 खरब 85 अरब 94 करोड 74 लाख रुपये। जबकि सेस की रकम जो अलग अलग मदों में खर्च होती है वह 10 खरब 8 अरब 71 करोड 53 लाख रुपये। यानी सरकार के पास जो रकम बच जाती है वह 7 खरब 77 अरब 23 करोड 21 लाख रुपये की होती है। यानी सेस  लगाकर सरकार जो हर क्षेत्र में सेस के रुपयों के जरीये जिस राहत की बात करती है अगर तीन बरस के बचे हुए रकम को ही देखे तो सब मिलाकर 17 खरब 41 अरब 38 करोड 81 लाख रुपये सरकारी खजाने में ही है। यानी ये सवाल दूर की  गोटी है कि सेस के जरीये जिन क्षेत्रों में काम होना चाहिये था, वह काम उन क्षेत्रों में हुआ या फिर सेस का बोझ जनता पर पड़ा और सरकार की रईसी हो गई। तो अगला सवाल है कि वह कौन से क्षेत्र थे जहा से सेस बटोरा गया। तो सिलसिलेवार तरीके से क्षेत्र और उससे सिर्फ बीते बरस यानी 2016-17 में कितनी कमाई सरकार ने कर ली उसे देखें ।
मसलन प्राइमरी एंड एजुकेशन सेस [  रु 202198800000 ] , सेकेन्डरी एंड हायर एजुकेशन सेस [  रु 100281900000 ], क्लीन इनर्जी सेस [ रु 261172500000 ] , एडिशनल अक्साइज ड्यूटी आन मोटर स्प्रिट [ रु  188278300000 ], एडिशनल एक्साइज ड्यूटी आन हाई स्पीड डिजल [ रु 535717000000 ] , नेशनल क्लाइमटी कौटिजेंट ड्यूटी [ रु 64262000000 ], शुगर सेस [  रु 28816100000 ], फिचर फिल्म पर सेस [ रु 8600000 ], आइरन ओर पर सेस [  रु 75200000 ],  लाइम स्टोन एंड डोलोमाइट पर सेस [ रु 108200000 ] , बीडी पर सेस [ रु 1362100000 ] , एक्सपोर्ट पर सेस [ रु 1772100000 ], कोक एंड कोल पर सेस [ रु 6400400000] , जूट पर सेस [  रु 960700000 ], चाय पर सेस [  रु 622800000 ], नारियल पर सेस [ रु 2100000 ], आयल एंड आयल सीड पर सेस [रु 3400000 ] , काटन पर सेस [ रु 100000 ], नमक पर सेस [ रु 9100000 ], तंबाकू पर सेस [  रु 1200000 ], रबर पर सेस [  रु 1023000000], कच्चे तेल पर सेस [ रु 126183100000 ] , काफी पर सेस [ रु 11000000 ],कागज पर सेस [रु 721300000 ] , स्ट्रा बोर्ड पर सेस [ रु 300000], आटोमोबाईल पर सेस [ रु 4085500000 ], टैक्सटाइल एंड टैक्सटाइल मशीनरी पर सेस [ रु 23100000 ] , मैच पर सेस [ रु 500000 ], अन्य कामोडेटी पर सेस [ रु 62400000],रिसिप्ट फ्राम सेस आन अदर एक्ट [  रु 31900000 ], कृषि कल्याण सेस [ रु 837915000 ], इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सेस [ रु 39176500000] , स्वच्छ भारत सेस [ रु 124753900000 ], पानी में प्रदूषण रोकने पर सेस [ रु 2158400000] , रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेस  [  रु 11872400000] ।

तो इतने माध्यमों के जरीये जनता पर सेस का बोझ डाला गया । तो अगला सवाल है कि इसे खर्च कहां किया गया तो 2016-17 में जिन क्षेत्र में जितना रकम खर्च की गई जरा उसे परख लें।  प्रारभिक शिक्षा कोष में 19734700000 रु , क्लीन इनर्जी फंड में डाला गया 64667500000 रुपये , सेन्ट्रल रोड कोष में डाला गया 518535800000 रु , डिजास्टर/आपदा फंड 64500000000 रुपये । शुगर डेवलेपमेंट फंड में डाला गया 23128100000 रुपये , इसी तरह राष्ट्रीय स्च्छता कोष में दिया गया 100000000000 रुपये । कृषि कल्याण कोष में 35962800000 रु , भारत इन्फ्रास्ट्रक्चर कोष में दिया गया 3140000000 रु , जल प्रदूषण को रोकने के लिये कोष में डाला गया 1456400000 रुपये । यानी बीते बरस एक तरफ सेस के जरीये 1 लाख 78 हजार 594 करोड रुपये जनता से लिये गये तो दूसरी तरफ एक लाख 871 करोड रुपये खर्च भी हुये। यानी 41 हजार करोड से ज्यादा की रकम खर्च हुई नहीं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कच्चे तेल पर जो सेस लिया गया। क्योंकि एक तरफ जिस दौर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सबसे कम थीं। उस दौर में भी पेट्रोल-डीजल की कीमत भारत के बाजार में सबसे ज्यादा थी । बावजूद इसके कच्चे तेल पर भी सेस वसूला जा रहा था ।  मसलन , 2016-17 में 12618.31 करोड रुपये सेस से लिये । 2015-16 में 14310.69 करोड रुपये सेस से लिये । तो उससे पहले बरस यानी 2014-15 में 14655.05 करोड रुपये सेस से वसूले । तो 2014 से दिसबंर 2017 तक कच्चे तेल पर सेस लगाकर सरकार ने 49,927 करोड की कमाई की या कहे जनता से सेस बसूला गया । और कभी इसका जवाब दिया नहीं गया कि सेस जिस लिये लिया जाता है उसपर खर्च भी होता है कि नहीं । और इसका सबसे बडा उदाहरण है स्वच्छ बारत सेस के जरीये बीते बरस जनता से वसूला गया 12475.39 करोड और राष्ट्रीय स्वच्छता कोष में डाले गये 10 हजार करोड़। यानी स्वच्छता के सेस में भी सरकार 2475.39 करोड रुपये बचा ले गई।

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पुण्य प्रसून वाजपेयी आज तक के पूर्व प्राइम टाइम एंकर और एग्जिक्यूटिव एडिटर थे. खबरों की दुनिया में पुण्य प्रसून वाजपेयी बेहद जाना पहचाना नाम है. इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट पत्रकारिता में 20 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. पुण्यय प्रसून को दो बार पत्रकारिता के प्रतिष्ठित इंडियन एक्सपप्रेस गोयनका अवार्ड से नवाजा गया है. पहली बार 2005-06 में हिंन्दी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उनके योगदान के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया. दूसरी बार वर्ष 2007-08 में हिंदी प्रिंट पत्रकारिता के लिए गोयनका अवार्ड से नवाजा गया. यह पुरस्कार दो बार प्राप्त करने वाले वो एकमात्र पत्रकार हैं. पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भारत के कई बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है जिनमें जनसत्ता, संडे ऑब्जर्वर, संडे मेल, लोकमत व एनडीटीवी शामिल हैं. 2007-08 में पुण्य प्रसून वाजपेयी 8 महीनों के लिए सहारा समय चैनल से भी जुडे रहे. पुण्य प्रसून लाइव एंकरिंग की अपनी खास स्टाइल के चलते इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसिद्ध हैं. दिसंबर 2001 में संसद भवन पर हुए आतंकी हमले की लगातार 5 घंटों तक लाइव एंकरिंग करने के लिए भी पुण्य प्रसून को खूब प्रसिद्धि मिली. पुण्य प्रसून वाजपेयी ने 6 किताबें भी लिखी हैं जिनमें ‘आदिवासियों पर टाडा’, ‘संसदः लोकतंत्र या नजरों का धोखा’, ‘राजनीति मेरी जान’, ‘डिजास्टरः मीडिया एंड पॉलिटिक्स’ शामिल हैं.

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