“हम बेरोजगार नहीं है”

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हम बेरोजगार नहीं हैं
भैया
बेरोजगार नहीं है
ज़िन्दगी इंतेज़ार में
बित गई है आधी
जिसको प्यार किया था
उसकी भी हो गई शादी
अपना काम स्वयं करो का
नारा हमनें लगाया है
हाथों की लकीरें मिट गई
कैसा नसीब ये पाया है
नफ़रत ख़ुद से हो गई
अब कोई प्यार नहीं है भैया
अब कोई प्यार नहीं है
हम बेरोजगार नहीं हैं
भैया
बेरोजगार नहीं हैं

फाइलों में डिग्रीआ
अब रखे रखे जलते है
हम अपनें आंसू में साहब,
गरम पकौड़े तलते है
मदिरा तो मदिरा है
हम तो चाय पीते है
टपरे वाले दोस्त हमारे
हमसे ही तो जीते है
बातों ही बातों में हम
नई सरकार बनाते है
सबसे पहले मंत्रियों को
दोषी हम बतलाते हैं
शिक्षा और बेरोजगारी को
सबसे पहले गिनाते है
हम जैसे युवाओं कि
है बहुत बड़ी तादाद
भटकते रहते नौकरी को
दिल्ली और धनबाद
पहले पर है त्रिपुरा
और  ‎21वे पर भोपाल
क्या सुनाए अब हम दुखड़ा
है यही देश का हाल
सारा राज्य है रो रहा
इसमें
केवल बिहार नहीं है भैया
केवल बिहार नहीं है
हम बेरोजगार नहीं हैं
भैया
हम बेरोजगार नहीं है

सिद्धान्तों से पेट न भरता
हम तो भूख मिटाते है
रात में पार्टी की खातिर
रैली में मार भी खाते है
मंचों पर जो मिल जाए मौका
सोया देश जगाते है
ख़ुद की नौकरी नहीं हो रही
दूसरों का लगवाते है
हमारा धर्म बस युवा है
कोई धर्म ना अपनाते है
हम दोस्त है तो ऐसे है कि
होली ईद मानते है
मगर सियासत में जो उलझे
मस्जिद मंदिर भी गिराते हैं
हम काटते है अपने भाई को
लेकिन तलवार नहीं है
भैया
लेकिन तलवार नहीं है
हम बेरोजगार नहीं हैं
भैया
हम बेरोजगार नहीं है…

@Bozo

RURBAN YOUTH

सन्नी कुमार “Bozo”

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